17 अक्टूबर गरीबी उन्मूलन के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस पर हिंदी कविता

17 अक्टूबर गरीबी उन्मूलन के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस

manibhainavratna

शर्म करें गरीबी पर- मनीभाई ‘नवरत्न’

शर्म करें गरीबी पर – मनीभाई ‘नवरत्न’ बहुत गर्व है अपने भारत पर पर आओ,थोड़ा बहुत शर्म करें गरीबों की गरीबी पर ।हल नहीं है ,सिक्का थमा देना उन हाथों को,जिन्हें चाहिए रोटी ,जिनकी किस्मत है खोटी।तो कैसे मिलेगा इंसाफ?फुटपाथ में या गटर में या फिर इंसानों के हेय नजर में ।चुंकि फुर्सत तो नहींसभ्य समाज कोशिक्षा स्वास्थ्य के घोटाले मेंअपनी …

शर्म करें गरीबी पर- मनीभाई ‘नवरत्न’ Read More »

गरीबी पर कविता (17 अक्टूबर गरीबी उन्मूलन के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस पर कविता )

गरीबी पर कविता गरीबी तू इतना रूलाया न कर हमेंजो मर गये तो, कहाँ पे तेरा आसरा है?मज़ाक उड़ाया सबके सामने कुछ यूँवाह भाई! अमीरों सा तेरा भी नखरा है? ?मनीभाई नवरत्न छत्तीसगढ़

गरीबी का दर्द-महेश गुप्ता जौनपुरी

गरीबी का दर्द क्या दर्द देखेगी दुनिया तेरीसुख गया है आंखों के पानीरिमझिम बारिश की फुहार मेंसमेट रखा है आंचल मेंगरीब तेरी कहानी कोउपहास बनायेगी ये दुनियातू कल भी फुटपाथ पर थाआज भी तेरी यही कहानी हैगरीब था तू गरीब रहेगावंचित तू अपने तकदीर से रहेगासुन गरीब लगा लें जोरअपना अस्तित्व बचा ले अबअब ना …

गरीबी का दर्द-महेश गुप्ता जौनपुरी Read More »

हाय रे गरीबी

हाय रे गरीबी                (१)भूख में तरसता यह चोला,कैसे बीतेगी ये जीवन।पहनने के लिए नहीं है वस्त्र,कैसे चलेगी ये जीवन।              (२)किसने मुझे जन्म दिया,किसने मुझे पाला है।अनजान हूं इस दुनिया में,बहुतों ने ठुकराया है।            (३)मजबुर हूं भीख मांगना,छोटी सी  अभी बच्ची हूं।सच कहूं बाबू जी,खिली फूल की कच्ची हूं।          (४)छोटी सी बहना को,कहां कहां उसे …

हाय रे गरीबी Read More »

गरीबी का घाव

गरीबी का घाव आग की तपिस में छिलते पाँवभूख से सिकुड़ते पेटउजड़ती हुई बस्तियाँऔर पगडण्डियों परबिछी हैं लाशें ही लाशेंकहीं दावत कहीं जश्नकहीं छल झूठे प्रश्नतो कहीं …. आलीशान महलों की रेव पार्टियाँदो रोटी को तरसतेहजारों बच्चों परकर्ज की बोझ से दबेलाखों हलधरों परऔर मृत्यु से आँखमिचोली करतेश्रमजीवी करोड़ों मजदूरों परशायद! आज भी …. किसी …

गरीबी का घाव Read More »

You cannot copy content of this page