उपभोग का पहाड़ – मनीभाई नवरत्न
प्रकृति और पर्यावरण🛍️ उपभोग का पहाड़ 🛍️ वे बाज़ार जाते हैंबस एक कपड़ा लेने,पर लौटते हैं —थैले से लदे,मन से खाली। आवश्यकता दरवाज़े पर रह जाती है,लालच भीतर कुर्सी पर बैठ जाता है।“सेल चल रही है”,“एक खरीदो एक मुफ़्त पाओ” —ये जादू के शब्द हैं,जो मनुष्य को वस्तु बना देते हैं। दुकानों में अब वस्त्र नहीं,स्वप्न टंगे
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