नारी जीवन और संवेदना

माँ से मंगल तक: नारी की अनंत उड़ान

🌺 माँ से मंगल तक: नारी की अनंत उड़ान | हिंदी कविता

नारी जीवन और संवेदना, हिंदी कविता

🌺 माँ से मंगल तक: नारी की अनंत उड़ान | हिंदी कविता इस कविता में:इस कविता में माँ से मंगल तक: नारी की अनंत उड़ान को भावप्रद और ओजपूर्ण शैली में प्रस्तुत किया गया है, जहाँ नारी की शक्ति घर की देहरी से अंतरिक्ष तक विस्तार पाती है। माँ से मंगल तक: नारी की अनंत […]

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yogasan

नारी: नवयुग की शक्ति – बदलाव की प्रचंड ज्योति

नारी जीवन और संवेदना, हिंदी कविता

नारी: नवयुग की शक्ति पर आधारित यह ओजपूर्ण कविता आधुनिक स्त्री की आत्मनिर्भरता, संघर्ष और सामर्थ्य का भावप्रद चित्रण प्रस्तुत करती है। नारी: नवयुग की शक्ति केवल एक शीर्षक नहीं, यह समय की पुकार है।आज की नारी सीमाओं को तोड़कर अपने अस्तित्व का नया मानचित्र रच रही है।वह करुणा भी है, वह क्रांति भी है;वह

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महावीर स्वामी — मनीभाई नवरत्न

नारी जीवन और संवेदना

महावीर स्वामी — मनीभाई नवरत्न भारत की आध्यात्मिक धरती परजब अहिंसा की रोशनी मंद पड़ रही थी,जब जीवन की पीड़ा कोकोई स्थिर मार्ग नहीं मिलता था—तब एक दिव्य स्वर प्रकट हुआ,जिसने कहा—“शांति बाहर नहीं, अपने भीतर से उपजती है।”वही स्वर बने—महावीर स्वामी। 599 ईसा पूर्व की वह सुबह,कुण्डग्राम की धरतीएक असाधारण आत्मा का स्वागत कर

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अंग्रेजी नववर्ष अभिनंदन / आचार्य गोपाल जी

नारी जीवन और संवेदना

अंग्रेजी नववर्ष अभिनंदन १.कहें चौबीस अलविदा, स्वागत है नववर्ष|मंगल मोद मना रहे़ं , है प्रतीक्षा सहर्ष ||है प्रतीक्षा सहर्ष, स्वप्न चौबीस के सजे|हर्षित जनमन‌ आज, नूतन संवत् विराजे||विनय करे ‘गोपाल’ , खुशी बाँटते सब रहे़ं।अंग्रेजी वर्ष की ,शुभेच्छा भी सभी कहें || २.मंगलमय  नववर्ष  हो, खुशमय हो परिवार।घर में मिल-जुल कर रहें,बाँटें सबको प्यार।।बाँटें सबको

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एक जनवरी पर कविता / शिवशंकर शास्त्री “निकम्मा”

नारी जीवन और संवेदना

एक जनवरी भारत का,कोई  भी नूतन साल नहीं।। चैत्र प्रतिपदा शुक्ल पक्ष,नववर्ष है, किसको ख्याल नहीं? पेड़ों में पत्ते हैं पुराने,ठिठुर रहे हम जाड़े में।धुंध आसमां में छाए हैं,जलती आग ओसारे में।।तन में लपेटें फटे पुराने,कहीं न जाड़ा लग जाए,।धूप सूर्य की नहीं मिल रही,तरस रहें कि मिल जाए।। हमें जनवरी ना भाये, है हमसे

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चँदैनी पर कविता

नारी जीवन और संवेदना

शिवकुमार श्रीवास “लहरी” छत्तीसगढ़ के एक प्रसिद्ध कवि हैं। उनकी यह कविता “चँदैनी पर रोला” छत्तीसगढ़ की लोककथा लोरिक-चंदा पर आधारित है। इस कविता के माध्यम से उन्होंने छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और विशेषकर चंदैनी नृत्य को रोचक ढंग से प्रस्तुत किया है। चँदैनी पर कविता काव्य विधा : –रोला कथा नृत्य दो रूप, चँदैनी

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डंडा नृत्य पर कविता

नारी जीवन और संवेदना

शिवकुमार श्रीवास “लहरी” छत्तीसगढ़ के एक प्रसिद्ध कवि हैं। उनकी यह कविता “डंडा नृत्य” छत्तीसगढ़ के लोकप्रिय नृत्यों में से एक, डंडा नृत्य पर केंद्रित है। डंडा नृत्य छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का एक अभिन्न अंग है और यह नृत्य विशेष रूप से कार्तिक और फाल्गुन महीने की पूर्णिमा पर किया जाता है। कवि

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इंद्रधनुष के रंग उड़े हैं/ बाबू लाल शर्मा *विज्ञ*

नारी जीवन और संवेदना

इंद्रधनुष के रंग उड़े हैं/ बाबू लाल शर्मा *विज्ञ* इन्द्र धनुष के रंग उड़े हैं. देख धरा की तरुणाई।छीन लिए हाथों के कंगन. धूम्र रेख नभ में छाई।। सुंदर सूरत का अपराधी. मूरत सुंदर गढ़ता हैकौंध दामिनी ताक ताक पथ. चन्दा नभ में चढ़ता है. नारी का शृंगार लुटेरापाहन लगता सुखदाई।इन्द्रधनुष…………..।। यौवन किया तिरोहित नभ

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धाकड़ मनु भाकर / शिवराज चौहान, हरियाणा

नारी जीवन और संवेदना

मनु भाकर एक भारतीय शूटर हैं जिन्होंने अपनी युवा उम्र में ही राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शूटिंग में कई उपलब्धियाँ हासिल की हैं। उनका पूरा नाम मनु भाकर है और वह हरियाणा, भारत से ताल्लुक रखती हैं। उन्होंने पिस्टल शूटिंग इवेंट्स में भारत का प्रतिनिधित्व किया है। धाकड़ मनु भाकर/ शिवराज चौहान, हरियाणा हरियाणा

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shri Krishna

कृष्ण रासलीला

नारी जीवन और संवेदना

कृष्ण रासलीला लीला राधे कृष्ण सम,आँख उठा के देख।लाख कोटि महा शंख में,लख लीला है एक।। सब देवों की नारियाँ,कर नित साज सिंगार।गमन करें शुचि रास में ,बन ठन हो तैयार।। कृष्णप्रेम विह्वल शम्भु,निज मन कियो विचार।राधे कृष्ण प्रेम परम ,जा देखूँ इक बार।। शिव गौरा से जा तभी,कहने लगे सकुचाय।रास लखन मै भी चलूँ

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गोवर्धन कर धरते हो/ प्रवीण त्रिपाठी

नारी जीवन और संवेदना

गोवर्धन कर धरते हो/ प्रवीण त्रिपाठी नटवर नागर प्यारे कान्हा, गोवर्धन कर धरते हो।इंद्र देव का माधव मोहन, सर्व दर्प तुम हरते हो। ब्रज मंडल के सब नर-नारी, इंद्र पूजते सदियों से।लीलाधारी कृष्ण चन्द्र को, कभी न भाया अँखियों से।उनके कहने पर ब्रजवासी, लगे पूजने गोवर्धन।देवराज का दम्भ तोडने, लीलाएँ नव करते हो।1 गोवर्धन का

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कृष्ण रंग रंगी मीरा /अर्चना पाठक

नारी जीवन और संवेदना

कृष्ण रंग रंगी मीरा/ अर्चना पाठक तज महल अटारी ,कर सितार लिये गली गली श्याम संग घूमी मीरा । वीणा के तार कृष्ण दास हुये भक्ति के रंग में रंगी मीरा । पराधीनता की गहरी टीस लिये। विरक्ति के गीत में रमी मीरा। परिजनों के क्रोध और विद्रोह सहे। सदा कृष्ण भक्ति में लीन मीरा।

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