नारी जीवन और संवेदना

shri Krishna

श्रीकृष्ण पर कवितायें- जन्माष्टमी पर्व विशेष

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श्रीकृष्ण पर कवितायें हठ कर बैठे श्याम, एक दिन मईया से बोले।ला के दे-दे चंद्र खिलौना चाहे तो सब ले-ले।हाथी ले-ले, घोड़ा ले-ले, तब मईया बोली।कैसे ला दूं चंद्र खिलौना, वो तो है बहुत दूरी। दूर गगन में ऐसे चमके, जैसे राधा का मुखड़ा।देख के ऐसा रूप सलोना कान्हा का मन डोला।राधा रानी को आज […]

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सरस्वती वंदना

सरस्वती वंदना/डॉ0 रामबली मिश्र

नारी जीवन और संवेदना

सरस्वती वंदना/डॉ0 रामबली मिश्र दिव्य मधुर रस देनेवाली।कष्ट क्लेश को हरनेवाली।।चेतन सत्ता ज्ञानामृत हो।बनी लेखिका सत शुभ कृत हो।। अंतर्दृष्टि सहज देती हो।मिथ्या भ्रम को हर लेती हो।।सत्कर्मों की शिक्षा देती।प्रेम पंथ की दीक्षा देती।। क्षिति जल पावक गगन समीरा।सबमें रहती बनी सुधीरा।।परम विज्ञ ब्रह्माणी तुम हो।कला प्रवीण भव्य प्रिय तुम हो।। वरप्रदा नित कामरूप

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छत्तीसगढ़ कविता

कविता : छत्तीसगढ़ के धरना का इतिहास पर चौपाई / आशा आज़ाद

नारी जीवन और संवेदना

कविता : छत्तीसगढ़ के धरना का इतिहास पर चौपाई / आशा आज़ाद  सन् 1995 से पृथक राज्य अखंड धरना आंदोलन प्रारंभ  आज सुनाऊँ सुनलो गाथा।सुनकर झुक जाता है माथा। राज्य पृथक जो आज कहाया।धरना आदोंलन से आया।। नौ अप्रैल की घटना जाने।सन उन्नीस पंचानवे माने। दशम दिसंबर हुआ समापन। हुए प्रफुल्लित मानब जन जन।। धरना

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patang subh makar sankranti

मकर संक्रांति आई है / रचना शास्त्री

नारी जीवन और संवेदना

मकर संक्रांति आई है / रचना शास्त्री मगर संक्रांति आई है। मकर संक्रांति आई है। मिटा है शीत प्रकृति में सहज ऊष्मा समाई है। उठें आलस्य त्यागें हम, सँभालें मोरचे अपने । परिश्रम से करें पूरे, सजाए जो सुघर सपने | प्रकृति यह प्रेरणा देती । मधुर संदेश लाई है। मिटा है शीत प्रकृति में

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Jai Sri Ram kavitabahar

रामजी विराजेंगे / रमेश कुमार सोनी

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रामजी विराजेंगे / रमेश कुमार सोनी रामजी आए हैं संग ख़ुशियाँ लाए हैं सज-धज चमक रही हैं गलियाँपलक-पाँवड़े बिछे हैं सबकेरंगोलियाँ लगी दमकने हो गए हैं सबके वारे-न्यारे जन्मों के सोये भाग लगे मुस्काने। अभागे चीखते रहेये बनाओ,वो बनाओ-बनेगा वही जो‘होइहैं वही जो राम रुचि राखा’,जगमग हैं घर-घरौंदेंसजधज लौटी है दीवालीआनंद मगन नाच रहे हैं

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Jai Sri Ram kavitabahar

राम अयोध्या आते है /डॉ एन के सेठी

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राम/श्रीराम/श्रीरामचन्द्र, रामायण के अनुसार,रानी कौशल्या के सबसे बड़े पुत्र, सीता के पति व लक्ष्मण, भरत तथा शत्रुघ्न के भ्राता थे। हनुमान उनके परम भक्त है। लंका के राजा रावण का वध उन्होंने ही किया था। उनकी प्रतिष्ठा मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में है क्योंकि उन्होंने मर्यादा के पालन के लिए राज्य, मित्र, माता-पिता तक का त्याग किया। राम अयोध्या आते है /डॉ एन के सेठी पूरा कर वनवास सिय संग,राम अयोध्या आते है।भ्राता लखन

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नरक चतुर्दशी पर कविता (Poem on Narak Chaturdashi in hindi)

नारी जीवन और संवेदना

नरक चतुर्दशी पर कविता: नरक क्या है चतुर्दशी और इससे जुडी कविताएँ नरक चतुर्दशी को छोटी दीपावली भी कहते हैं। इसे छोटी दीपावली इसलिए कहा जाता है क्योंकि दीपावली से एक दिन पहले, रात के समय उसी प्रकार दीए की जगमगाहट से रात के तिमिर को प्रकाश पुंज से दूर भगा दिया जाता है जैसे

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ये है मेरा वतन

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ये है मेरा वतन ये है मेरा वतन मेरा गंगा जमन ।ये देश है गौतम गांधी काये देश है नेहरू शास्त्री कायहाँ तिरंगा प्यारा है।यहाँ गंग यमुन की धारा है ।ये मेरा तन मन मेरा जीवन । ये है मेरा वतन मेरा गंगा जमनयहाँ तुलसी और कबीर हैयहाँ प्रीत का रंग अबीर हैयहाँ राम और

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भारत मां के सपूत

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भारत मां के सपूत                   (1)तिलक लगाकर चल, भाल सजाकर चल।माटी मेरे देश की, कफ़न लगाकर चल।देश में वीर योद्धा जन्मे, मच गई खलबल।भारत मां के सपूत है ,आगे चल आगे चल। (2)भगत ,चंद्रशेखर, सुखदेव थे क्रांतिकारी दल।अंग्रेजो के नाक में ,दम कर रखा था हरपल।देश आजादी पाने के लिए,बना लिए दलबल।भारत मां के सपूत है

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बेटियाँ

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बेटियाँ बेटियां प्रकृति की देन है,बेटियां देवदूत,देव कन्याएँ है,कोमल इनकी भावनाएँ है,बेटियां अप्सराएँ है,लक्ष्मी, सरस्वती, सावित्री  है।बेटियां अन्नपूर्णा सी उपमाएँबेटियां वेदों सी पवित्र है,बेटियां संस्कारो की धरोहर है,बेटियां नव निर्माण की कल्पनाएँ ,बेटियां  ईश्रवर का लेख है।बेटियां खिलती कलियां है,बेटियां संस्कृति की परिचारक है,बेटियां संस्कारो की धरोहर है,बेटियां ज्ञान की सहस्त्र धाराएं है,बेटियां नव निर्माण

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बूढ़ी हो गई हैं स्वेटर

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बूढ़ी हो गई हैं स्वेटर समय के साथबूढ़ी हो गई हैं स्वेटर…यकायक आज..संदूक से निकालकर… आलमारी में सजाते समयधर्मपत्नी बोल उठी थी..आधुनिक समय में कद्र कहाँ है …?दिन रात…आंखें चुंधिया गई थी..बूढ़ी आंखें….लेकिन स्नेह से भरपूर…मशीनों में स्नेह थोड़े ही होता है…?नदारद..कितना मोलभाव किया था..पसंद की पषम…आज तो दुकानें भी मिलती हैं सहज..दुर्लभ है ढूंढना…आधुनिकीकरण

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