1 नवम्बर छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस पर कविता

1 नवम्बर छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस

छत्तीसगढ़ कविता

कविता : छत्तीसगढ़ के धरना का इतिहास पर चौपाई / आशा आज़ाद

नारी जीवन और संवेदना

कविता : छत्तीसगढ़ के धरना का इतिहास पर चौपाई / आशा आज़ाद  सन् 1995 से पृथक राज्य अखंड धरना आंदोलन प्रारंभ  आज सुनाऊँ सुनलो गाथा।सुनकर झुक जाता है माथा। राज्य पृथक जो आज कहाया।धरना आदोंलन से आया।। नौ अप्रैल की घटना जाने।सन उन्नीस पंचानवे माने। दशम दिसंबर हुआ समापन। हुए प्रफुल्लित मानब जन जन।। धरना […]

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छत्तीसगढ़ कविता

कविता : छत्तीसगढ़ निर्माण में अखण्ड धरना आंदोलन पर दोहा / श्रीमती आशा आजाद

हिंदी कविता

छत्तीसगढ़ निर्माण में अखण्ड धरना आंदोलन नामक हिन्दी कविता छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के लिए किये गये संघर्ष पर आधारित हिंदी दोहावली है. छत्तीसगढ़ निर्माण में अखण्ड धरना आंदोलन राज्य शुभे छत्तीसगढ़, प्रेम अमिट विश्वास ।धरना अखंड जो चला, उसका है इतिहास ।। उन्नीसी पंचानवें, धरना शुरु था जान ।दशम दिसंबर तक चला, अमिट पृथक पहचान

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छत्तीसगढ़ दर्शन

हिंदी कविता

छत्तीसगढ़ दर्शन टिकली अस बलरामपुर ,जिंहा सुग्घर ताता पानी।सूरजपुर म कुदरगढ़ी हे,कोरिया ले हसदो पानी। नागलोक जशपुर कुनकुरी,सीताबेंगरा सजे सरगुजा।जामवंत पेंड्रा मरवाही ,कोरबा म कोईला दूजा। कबरा गूफा रायगढ़ वाला,जांजगीर म दमउदहरा।बिलासा माई के बिलासपुर,मुंगेली मदकु दीप हे गहरा। कूशियार अस मीठ कवर्धा,गिधवा ह उड़थे बेमेतरा,चलौ बलौदा गुरु धाम ए,महासमुंद नदी के धारा। राजधानी हे

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छतीसगढ़ दाई

हिंदी कविता

छतीसगढ़ दाई चंदन समान माटीनदिया पहाड़ घाटीछतीसगढ़ दाई। लहर- लहर खेतीहरियर हीरा मोतीजिहाँ बाजे रांपा-गैंतीगावै गीत भौजाई। भोजली सुआ के गीतपांयरी चूरी संगीतसरस हे मनमीतसबो ल हे सुहाई। नांगमोरी,कंठा, ढारकरधन, कलदारपैंरी,बहुँटा श्रृंगारपहिरे बूढ़ीदाई । हरेली हे, तीजा ,पोराठेठरी खुरमी बरानांगपुरी रे लुगरापहिरें दाई-माई। नांगर के होवै बेराखाये अंगाकर मुर्राखेते माँ डारि के डेराअर तत कहाई।

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छत्तीसगढ़ी गीत : हमर देश के हमर राज

हिंदी कविता

छत्तीसगढ़ी गीत : हमर देश के हमर राज हमर देश के हमर राज ,रखबो जेकर लाज गा।दीदी भई जम्मो रे संगी, करथे जेकर बर नाज गा।चिरई चिरकुन हामन जइसे,रिकिम-रिकिम के रंग बोली।बागे बगीचा मा जइसे ,करत राथे हंसी ठिठोली ।हमर मिलइ-जुलइ के देखे, झपटे सके ना बाज गा।दीदी भई जम्मो रे….. गांव शहर एके बरोबर

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मोर छत्तीसगढ़ महतारी

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मोर छत्तीसगढ़ महतारी मोर छत्तीसगढ़ महतारी,तोर अलग हे चिनहारी!देवता धामी ऋषि मुनि मन,तप करीन इहाँ भारी!! आनी बानी के रतन भरे हे ,इहाँ के पावन माटी म !मया पिरती बढ़त रहिथे ,गिल्ली डंडा अऊ बांटी म !!नांगमुरी करधनिया संग म ,दाई गोड़ म पहिरे सांटी ….. भिलाई कोरबा बैलाडीला म,बड़़े – बड़े कारखाना हे !कटकट – कटकट डोंगरी

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महिमा मोर छत्तीसगढ़ के..गीत पद्मा साहू पर्वणी

हिंदी कविता

महिमा मोर छत्तीसगढ़ के छत्तीसगढ़ महतारी मोर, तोर महिमा हे बड़ भारी।गजब होवत हे नवा बिहान, छत्तीसगढ़ के संगवारी। ये भुइयाँ के नाम हे पहिली दक्षिण महाकोसल,अउ हे छत्तीस किला ले एकर छत्तीसगढ़ नाम।लव-कुश के जनम इही भुइयाँ मा संगी,कौशिल्या के मईके, अउ ननिहाल हरे प्रभु राम ।मध्यपरदेश के दुहिता, दाई मोर छत्तीसगढ़,हरियर लुगरा पहिने

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छतीसगढ़ दाई

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छतीसगढ़ दाई गमकत  हे  संगाती     चंदन समान माटी        नदिया पहाड़ घाटी                    छतीसगढ़ दाई। लहर- लहर खेती     हरियर हीरा मोती         जिहाँ बाजे रांपा-गैंती                   गावै गीत भौजाई। भोजली

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मोर छत्तीसगढ़ के भुंईयां- पदमा साहू

हिंदी कविता

मोर छत्तीसगढ़ के भुंईयां मोर जनमभूमि के भुंईयां मा माथ नवावंव गा।मोर छत्तीसगढ़ के भुंईयां मा माथ नवावंव गा।।जनम लेंव इही माटी मा ,,,,,2इही मोर संसार आवय गा–मोर………………… इंहा किसम- किसम के बोलबाखा मय छत्तीसगढ़िया हावंव।छत्तीसगढ़ म मोर जनम भूमि,मय एला माथ नवावंव।पले- बढे हों इही माटी मा,,,,2एला कईसे मय भुलावंव गा —मोर……………………… संगवारी मन

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छत्तीसगढ़ मैया पर कविता -श्रीमती शशिकला कठोलिया,

हिंदी कविता

छत्तीसगढ़ मैया पर कविता जय हो जय हो छत्तीसगढ़ मैया,सुन लोग हो जाते स्तंभित,राष्ट्रगान सा स्वर है गुजँता,छत्तीसगढ़ का यह राज गीत,नरेंद्र देव वर्मा की अमर रचना,है उसकी आत्मा की संगीत,छत्तीसगढ़िया को बांधे रखता ,यह पावन सुंदर सा गीत ,धरती का शुभ भावों से सिंगार कर,छत्तीसगढ़ माटी का बढ़ाया गौरव,गीत में साकार हो उठता ,समूचे

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छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस पर कविता

हिंदी कविता

छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस पर कविता चलो नवा सुरुज परघाना हे छत्तीसगढ़ राज्य पायेहनचलो नवा सुरुज परघाना हे !भारत माता के टिकली सहिक….छत्तीसगढ़ ल चमकाना हे !! जेन सपना ले के राज बने हेसाकार हमला करना हे!दिन -दुगनी ,रात -चौगुनीआगे -आगे बढ़ना हे !सरग असन ये भुईया ल….चक- चक ले चमकाना हे!! मिसरी असन भाखा

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