नारी जीवन और संवेदना

जुल्मी-अगहन

नारी जीवन और संवेदना

जुल्मी-अगहन जुलुम ढाये री सखी,अलबेला अगहन!शीत लहर की कर के सवारी,इतराये चौदहों भुवन!!धुंध की ओढ़नी ओढ़ के धरती,कुसुमन सेज सजाती।ओस बूंद नहा किरणें उषा की,दिवस मिलन सकुचाती। विश्मय सखी शरमाये रवि- वर,बहियां गहे न धरा दुल्हन!!जुलूम…..सूझे न मारग क्षितिज व्योम-पथ,लथपथ पड़े कुहासा। प्रकृति के लब कांपे-न बूझे,वाणी की परिभाषा।मन घबराये दुर्योग न हो कोई-  मनुज […]

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संस्कार पर कविता

नारी जीवन और संवेदना

संस्कार पर कविता अहो,युधिष्ठिर हार गया है,दयूत् क्रीड़ा में नारी को,दुःसाशन भी खींच रहा है,संस्कारों की हर साड़ी को। अपनी लाज बचाने जनता,सिंहासन से भीड़ जाओ तुम,भीख नही अधिकार मांगने,कली काल से लड़ जाओ तुम,विपरित काल घोर कलयुग है,ना याद करो गिरधारी को। अहो,युधिष्ठिर….सदियों को संस्कार सिखाकर,हम अब तक सीना ताने हैं।अपनाओ न पाश्चात्य सभ्यता,रिश्ते

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फरियादी हो (बेटी पर कविता)

नारी जीवन और संवेदना

फरियादी हो (बेटी पर कविता) आज कोख की बेटी ही,अब पूछे बन फरियादी हो। बिना दोष क्यों बना दिया है,मुझको ही अपराधी हो। ईश विधान जन्म मेरा फिर,तुम क्यों पाप कमाते हो।सुख दुःख का अनुमान लगा,हत्यारे बन जाते हो।आज कोख……। घर बगिया की  कोमल कलिका , मुझसे ही घर शोभित हो।अँगना में किलकारी मेरी,रिमझिम ध्वनि पग

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भ्रूण हत्या पर कविता

नारी जीवन और संवेदना

भ्रूण हत्या पर कविता भ्रूण हत्या का मचा एक नीरव रोर है,चोरी छिपे लिंग जाँच हर दिशा हर ओर है।जाने क्यों बेटी की हत्या का शौक ये चढ़ आया,गर्भ में ही भेदभाव का ये कृत्य सबको भाया। अपने ही कोख के अंश का माँ गला घोंट देती है,लिंग जाँच में बेटा हो तो हत्या रोक

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19 नवम्बर झाँसी की रानी लक्ष्मी बाई पुण्यतिथि पर कविता

नारी जीवन और संवेदना

खूब लड़ी मरदानी ● सुभद्राकुमारी चौहान बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, खूब लड़ी मरदानी वह तो झाँसीवाली रानी थी। सिंहासन हिल उठे, राजवंशों ने भृकुटी तानी थी, बूढ़े भारत में भी आई, फिर से नई जवानी थी, गुमी हुई आजादी की कीमत सबने पहचानी थी, दूर फिरंगी को करने की, सबने मन

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स्वामी दयानन्द सरस्वती जयन्ती (फाल्गुन कृष्ण) पर कविता

नारी जीवन और संवेदना

स्वामी दयानन्द सरस्वती जयन्ती (फाल्गुन कृष्ण) पर कविता वह दयानन्द ब्रह्मचारी O डॉ. ब्रजपाल सिंह संत दुनिया की प्यास स्वयं पीता, जल लहर बाँटता चलता है, पूरी आजादी का आसव, हर पहर बाँटता चलता है, स्वाभिमान की भावना से, भीरुता काटता चलता है, मानवता का संचालक बन, युग के आगे चलता है। अमृत की वर्षा

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पहला सुख निरोगी काया

नारी जीवन और संवेदना

पहला सुख निरोगी काया पहला सुख निरोगी काया,दूजा सुख घर में हो माया। तीजा सुख कुलवंती नारी,चौथा सुख पुत्र हो आज्ञाकारी। पंचम सुख स्वदेश में वासा,छठवा सुख राज हो पासा। सातवा सुख संतोषी जीवन ,ऐसा हो तो धन्य हो जीवन।

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हाइकु

वीणा के हाइकु

नारी जीवन और संवेदना

वीणा के हाइकु 1-कृष्णमुरारीबालभद्र,सुभद्रारथ सवारी।2-हरितालिकापति की लम्बी आयुपत्नी निर्जला।3-स्वयं विश्वासमिलेगी सफलतामंजिल पास।4-लाल गुब्बाराबालक खेल रहाबम धमाका।5-मणिकर्णिकाअंतरिक्ष पे बैठीहिन्द की नारी।          *सविता बरई “वीणा”सीतापुर, सरगुजा,(छ.ग.)

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नारी पर कविता

नारी जीवन और संवेदना, हिंदी कविता

स्त्री पर कविता ( Stree Par Kavita ): चैत्र नवरात्रि हिन्दु धर्म में नवरात्रि का बहुत महत्व है। चैत्र नवरात्रि चैत्र (मार्च अप्रेल के महीने) में मनाई जाती है, इसे चैत्र नवरात्रि कहा जाता है। नवरात्रि में दुर्गा के नौ रूपों की पूजा-आराधना की जाती है। चूकी दुर्गा माँ भी एक स्त्री है तो नारी शक्ति पर एक कविता नारी पर सुन्दर कविता आँखों  

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जगन्नाथ रथयात्रा पर हिंदी कविता (Jagannath Rathyatra)

नारी जीवन और संवेदना

रथ यात्रा दूसरे शब्दों में रथ महोत्सव एकमात्र दिन है जब भक्तों को मंदिर में जाने की अनुमति नहीं है, उन्हें देवताओं को देखने का मौका मिल सकता है। यह त्योहार समानता और एकीकरण का प्रतीक है।रथ यात्रा भारत के पुरी में जून या जुलाई के महीनों में आयोजित भगवान जगन्नाथ (भगवान विष्णु का अवतार) से जुड़ा एक प्रमुख हिंदू त्योहार है| पुरी रथ यात्रा विश्व प्रसिद्ध है और हर साल एक लाख तीर्थयात्रियों को आकर्षित करती है, न केवल भारत से बल्कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों से भी।

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Jai Sri Ram kavitabahar

राम कथा के हाइकु

नारी जीवन और संवेदना

रामकथा को आप अपनी विभिन्न कहानियों लेखों और कविताओं के माध्यम से जाना ही होगा । आज रामकथा को हाइकु के माध्यम से जानें, जिसे लिखा है रमेश कुमार सोनीजी ने। वैसे बता दें, हाइकु एक जापानी काव्य विधा है । राम कथा के हाइकु 1जटायु मनसीता लाज की रक्षामौत से लड़ा। 2राम का स्पर्शशीला,

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