नारी जीवन और संवेदना

रानी दुर्गावती पर कविता

नारी जीवन और संवेदना

रानी दुर्गावती पर कविता- भारत में जब भी महिलाओं के सशक्तिकरण की बात होती है तो महान वीरांगना रानी दुर्गावती की चर्चा ज़रूर होती है। रानी रानी दुर्गावती न सिर्फ़ एक महान नाम है बल्कि वह एक आदर्श हैं उन सभी महिलाओं के लिए जो खुद को बहादुर मानती हैं रानी दुर्गावती पर कविता जब दुर्गावती रण […]

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शिव महिमा कविता

नारी जीवन और संवेदना

शिव महिमा कविता शिव शिवा शिव शिवा शिव शिवा ।शिव शव हैं……शिवा के सिवा। शिव अपूर्ण हैं शक्ति के बिनाशक्ति कब पूर्ण हैं शिव के बिनाअनुराग का सत इनका है वफ़ा। लोचन मोचन वि..मोचन सबल तुम होकांति चमक दामिनी सकल तुम होकायनात का कण तूने है रचा। वो अर्धनारी वो अर्धपुरुष हैंऋषि मुनि के हर तो

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रंग देहूं तोला अपन रंग मा ओ

नारी जीवन और संवेदना

होली वसंत ऋतु में मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण भारतीय और नेपाली लोगों का त्यौहार है। यह पर्व हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। होली रंगों का तथा हँसी-खुशी का त्योहार है। यह भारत का एक प्रमुख और प्रसिद्ध त्योहार है, जो आज विश्वभर में मनाया जाने लगा है। विकिपीडिया

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सुभाष चंद्र बोस जयंती – उपमेंद्र सक्सेना

नारी जीवन और संवेदना

सुभाष चंद्र बोस जयंती – उपमेंद्र सक्सेना थे सुभाष जी मन के सच्चे, सबने उनको इतना माना।नेता जी के रूप में उन्हें, सारी दुनिया ने पहचाना। सन् अट्ठारह सौ सतानवे, में तेईस जनवरी आयीतब चौबीस परगने के कौदिलिया ने पहचान बनायीथा सुभाष ने जन्म लिया, माताजी प्रभावती कहलायींपिता जानकी नाथ बोस ने, थीं ढेरों बधाइयाँ

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शक्ति वंदना

नारी जीवन और संवेदना

दुर्गा या आदिशक्ति हिन्दुओं की प्रमुख देवी मानी जाती हैं जिन्हें माता, देवी, शक्ति, आध्या शक्ति, भगवती, माता रानी, जगत जननी जग्दम्बा, परमेश्वरी, परम सनातनी देवी आदि नामों से भी जाना जाता हैं। शाक्त सम्प्रदाय की वह मुख्य देवी हैं। शक्ति वंदना करूणाकर कौमारी माता कलिकाकारी तुम्हारी जय हो। खरलखड्ग खट हाथमें हरदम हेखलहारी तुम्हारी जय हो।गोमती गंगा गोदावरी गौरी गदाधारी

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नन्हे बहादुर-लाल बहादुर शास्त्री जी

नारी जीवन और संवेदना

नन्हे बहादुर-लाल बहादुर शास्त्री जी दोहा छंद सदी बीस प्रारंभ में, चलती चौथी साल।दो अक्टूबर को लिए, जन्म बहादुर लाल।। जन्मे मुगल सराय में, वाराणसी सनेह।राम दुलारी मात थी, पिता शारदा गेह।। बचपन में गुजरे पिता, पले बढ़े ननिहाल।निर्धनता का सामना, करते पढ़ते लाल।। फिर चाचा के पास में, पहुँचे मुगलसराय।शिक्षा मे रह अग्रणी, लाल

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दीपावली : सुवा गीत/ छत्तीसगढ़ी रचना

नारी जीवन और संवेदना

यहाँ पर दीपावली अवसर पर गए जाने वाला सुवा गीतों का संकलन किया गया है . छत्तीसगढ़ में सुआ गीत प्रमुख लोकप्रिय गीतों में से है। सुआ गीत का अर्थ है सुआ याने मिट्ठु के माध्यम से स्रियां सन्देश भेज रही हैं। सुआ ही है एक पक्षी जो रटी हुई चीज बोलता रहता है। इसीलिए

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नारी की सुन्दरता पर कविता – बाबूलाल शर्मा

नारी जीवन और संवेदना, हिंदी कविता

नारी की सुन्दरता पर कविता नीति नियामक हाय विधायक,भाग्य कठोर लिखे हित नारी।सत्य सदा दिन रात करे श्रम,वारि भरे घट ले पनिहारी।पंथ चले पद त्राण नहीं पग,कंटक कष्ट हुई पथ हारी।‘विज्ञ’ निहार अचंभित मानस,सुंदर नारि कि सुंदर सारी।. ….👀🌹👀….केश खुले घन कृष्ण घटा सम,ले घट हाथ टिका कटि धारे।गौर शरीर लगे अति कोमल,नैन झुके पर

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नारी के अधिकार पर कविता – बाबूराम सिंह

नारी जीवन और संवेदना, हिंदी कविता

नारी के अधिकार पर कविता – बाबूराम सिंह नारी है नारायणी जननी जगत जीव की ,सबहीं की गुरु सारी सृष्टि की श्रृंगार है ।जननीकी जननीभी नारीकी विशेषता है ,महिमा नारी की सदा अगम अपार है ।जननी बहिन बहु -बेटी धर्मपत्नी बन ,सुखद बनाती सदा घर परिवार है।आदर सत्कार मान”कवि बाबूराम “कर ,औरत के बिना सही

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हिंदी की है अद्भुत महिमा – उपमेंद्र सक्सेना

नारी जीवन और संवेदना

हिंदी की है अद्भुत महिमा हिंदी की है अद्भुत महिमा गीत-उपमेंद्र सक्सेना एडवोकेट जिसको जीवन में अपनाया, उसपर हम होते बलिहारीहिंदी की है अद्भुत महिमा, यह हमको प्राणों से प्यारी। हिंदी का गुणगान करें हम, हिंदी के गीतों को गाएँहिंदी की मीठी बोली से, सबके मन को अब हम भाएँ सदा फले- फूले यह भाषा,

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इस वसुधा पर इन्सान वहीं – बाबूराम सिंह

नारी जीवन और संवेदना

कविता इस वसुधा पर इन्सान वहीं —————————————- धन,वैभव,पदविद्या आदिका जिसको हैअभियाननहीं। सत्य अनुपम शरणागत इस वसुधा पर इन्सान वहीं। सत्य धर्म फैलाने आला, विषय पीकर मुस्काने वाला, अबला अनाथ उठाने वाला, प्यार, स्नेह लुटाने वाला परहित में मर जाने वाला।अपना और परायाका जिसकेउर अंदर भान नहीं। सत्य अनुपम शरणागत इस वसुधा पर इन्सान वहीं। पर

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नशा नर्क का द्वार है – बाबूराम सिंह

नारी जीवन और संवेदना

हिंदी कविता – नशा नर्क का द्वार है मानव आहार के विरूध्द मांसाहार सुरा,बिडी़ ,सिगरेट, सुर्ती नशा सब बेकार है।नहीं प्राणवान है महान मानव योनि में वो,जिसको लोभ ,काम,कृपणता से प्यार है। अवगुण का खान इन्सान बने नाहक में,बिडी़, सुर्ती,सुरा नशा जिसका आहार है।सर्व प्रगति का गति अवरोध करे,ऐसा जहर बिडी़ , सुर्ति मांसाहार है।

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