नारी जीवन और संवेदना

दूजराम साहू के छत्तीसगढ़ी कविता

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दूजराम साहू के छत्तीसगढ़ी कविता मोर गांव मे नवा बिहान झिटका कुरिया अब नंदावत हे,सब पक्की मकान बनावत हे ,खोर गली  सी सी अभियान आगे ,अब मोर गांव मे  नवा बिहान आगे।खाए बर अन ,तन बर कपड़ा ,खाए  पीये के अब नईहे लफड़ा ,रोजी मजूरी बर रोजगार गारेंटी अभियान आगे ,अब मोर  गांव मे नवा […]

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कारगिल के शहीदों को नमन करते हुए कविता

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कारगिल के शहीदों को नमन करते हुए कविता वतन के हिफाजत के लिए त्याग दिये अपने प्राण। तुमनें आह तक नहीं किये त्यागते समय अपने प्राण।। सीने में गोली खा के हो गये देश के लिए शहीद। मुख में था मुस्कान गोली खा के भी बोले जय हिंद।। मेरे वतन के जांबाज सिपाहियों तुमको शत्

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धूप पर कविता – पुष्पा शर्मा

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धूप पर कविता – पुष्पा शर्मा कोहरे की गाढी ओढनीहिमांकित रजत किनारी लगी।ठिठुरन का संग साथ लिया सोई  रजनी अंधकार पगी। ऊषा के अनुपम रंगों नेसजाई अनुपम रंगोली,अवगुण्ठन हटा होले सेधूप आई ,ले किरण टोली। इठलाती बलखाती सी वोसब ओर छा रही है, धूप।नर्म सी सबको सहलातीभाया इसका रूप अनूप । नव जीवन  संचार करतीसृष्टि

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छत्तीसगढ़ पर कविता – पंकज

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छत्तीसगढ़ महिमा – पंकज छत्तीसगढ़  महतारी मोर छत्तीसगढ़  महतारी।तोर  कोरा म  रहिथे दाई  दाता अउ भिखारी।उत्तर म  सरगुजा  हावे स्वर्ग  समान  कहाथे।दक्षिण म केशकाल के घाटी सबके मन ल मोहाथे।पश्चिम  म  मैकल  पर्वत  हे बैगा  मन के डेरा।अउ पूरब  म अब्बड़ ऊँचा  जशपुर क्षेत्र पठारी।छत्तीसगढ़  महतारी महानदी ल गंगा कहिथे सबके प्यास बुझाथे।डोंगरगढ़ बमलाई म

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भारत रत्न लताजी – ज्ञान भण्डारी

नारी जीवन और संवेदना

भारत रत्न लताजी – ज्ञान भण्डारी दूर झितिज,एक तारा टूटा ,रूठा धरा से, वो यों रूठा ,स्वर लहरी का , हर सुर डोला,शोकाकुल है बसंती चोला। कर्तव्य बोथ का भान तुम्हे था ,वेदना का अहसास तुम्हे था ,तुमने किए लाखो समर्पण ,उत्तम मिसाल दी नारी जीवन । साधिका थी तुम कंठ कोकिला ,रूप हंस वाहिनी

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वैष्णव जन तो तेने कहिये

नारी जीवन और संवेदना

वैष्णव जन तो तेने कहिये जे पीड परायी जाणे रे । पर दुःखे उपकार करे तो ये, मन अभिमान न आणे रे ॥ ॥ वैष्णव जन तो तेने कहिये..॥ सकल लोकमां सहुने वंदे, निंदा न करे केनी रे । वाच काछ मन निश्चळ राखे, धन धन जननी तेनी रे ॥ ॥ वैष्णव जन तो तेने

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सुभाष चंद्र बोस – उपेन्द्र सक्सेना

नारी जीवन और संवेदना

आजादी के महानायक नेता जी सुभाष चंद्र बोस जी की जयंती (23 जनवरी) पर उपमेंद्र सक्सेना एडवोकेट थे सुभाष जी मन के सच्चे, सबने उनको इतना माना।नेताजी के रूप में उन्हें, सारी दुनिया ने पहचाना।। सन् अट्ठारह सौ सतानवे, में तेईस जनवरी आयीतब चौबीस परगने के कौदिलिया ने पहचान बनायीथा सुभाष ने जन्म लिया, माताजी

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जीवन मूल्य पर आधारित कविता-राजकिशोर धिरही

नारी जीवन और संवेदना

जीवन मूल्य पर आधारित कविता कोई भी विपदा आ जाए,कभी नहीं घबराना।बाधाओं से लड़कर के ही,हमको बढ़ते जाना।। सत्य मार्ग में चलकर के हम,लक्ष्य सदा पा सकते ।कठिन डगर भी हो फिर भी हम,मंजिल तक जा सकते।। अधिकार मिले जो भी हमको,उसको पढ़ना होगा।वंचित करना चाहे हमको,आगे बढ़ना होगा।। भाईचारे की चाहत रख,प्रेम शांति से

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सावित्रीबाई फुले जयंती पर विशेष कविता – नारी शिक्षा की ज्योति

नारी जीवन और संवेदना, हिंदी कविता,

प्रतिवर्ष 3 जनवरी को सावित्रीबाई फुले का जयंती मनाया जाता हैं . यहाँ सावित्रीबाई फुले पर कविता दी जा रही हैं, आपको कैसी लगी सन्देश लिखकर भेजें . 3 जनवरी को सावित्रीबाई फुले की जयंती पर उन्हें समर्पित कविता। नारी शिक्षा की पथप्रदर्शक और समाज सुधारक सावित्रीबाई फुले के प्रेरणादायक जीवन पर आधारित विशेष काव्य।

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village based Poem

चित्र आधारित कविता: गाँव या ग्रामीण परिवेश पर कविता

नारी जीवन और संवेदना

चित्र आधारित कविता : गाँव या ग्रामीण परिवेश पर कविता , संपादक – आदरणीया कवयित्री रीता प्रधान जी , रायगढ़ , छत्तीसगढ़ गाँव या ग्रामीण परिवेश पर कविता मन चल उस गाँव में – प्रियदर्शनी आचार्य रवि रश्मियों का बाजिरथ, जहाँ उतरता गाँव मेंदूर क्षितिज के पार, प्रकृति की छाँव में ।मन चल उस गाँव

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इंदुरानी की कवितायेँ

नारी जीवन और संवेदना

कवयित्री इंदुरानी , स.अ, जूनियर हाईस्कूल, हरियाना, जोया,अमरोहा, उत्तर प्रदेश,244222 ,8192975925 वह भारत देश कहलाता है है विविधताओं मे एक जहाँ,वह भारत देश कहलाता है।हिन्दु ,मुस्लिम, सिख ,ईसाई जहां, आपस मे भाई-भाई का नाता है।जहाँ हाथों मे हाथ डाले सब झूमें,वहाँ तिरंगा नभ में लहराता है। मिल खिलाड़ी भिन्न-भिन्न  सब,विपरीत देश के छक्के छुड़ाता है।जहां हर

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देवकरण गंडास अरविन्द की कवितायेँ

नारी जीवन और संवेदना

यहाँ पर देवकरण गंडास अरविन्द की कवितायेँ दी जा रही हैं श्रमिक का सफर जब ढलता है दिन सब लौटते घरहर चेहरा कहां खुश होता है मगर,उसका रास्ता निहारती कुछ आंखेंपर खाली हो हाथ तो कठिन डगर।ऐसा होता है श्रमिक का सफर….. उसने सारा दिन झेला धूप पसीनाबना लिया है उसने खुद को पत्थरहाथ पांव

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