आध्यात्म और भक्ति

पुरुष को एक ओर रखो

आध्यात्म और भक्ति, हिंदी कविता

पुरुष को एक ओर रखो स्त्री के संसार का केंद्रपुरुष नहीं होना चाहिए,और पुरुष के संसार का केंद्रस्त्री नहीं। यह व्यवस्थाजंगल की है,मनुष्यता की नहीं। जब तकशरीर, हार्मोन,मातृत्व,और घोंसलाजीवन का केंद्र बने रहते हैं,मुक्तिकेवल शब्द रह जाती है। जिस दिनशरीर मालिक नहीं रहता,उसी दिनपुरुष भीआसक्ति नहीं रहता। रुको,और खुद से पूछो—जिसे तुमइतना महत्वपूर्ण मान रही

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माँ दंतेश्वरी के नाम ले, हिरदय म आस

आध्यात्म और भक्ति, हिंदी कविता

मुखड़ा (Intro) छत्तीसगढ़ के भुइयां म बिखरे उजास,माँ दंतेश्वरी के नाम ले, हिरदय म आस।नाचे धरती, गाए अम्बर,नाचे धरती, गाए अम्बर,और ढोलक की थाप,गरबा संग खो जाए, जीवन संताप। अंतरा 1 (Verse 1) महुए की खुशबू संग, बहती बयार,नाचा के कदमों में, नवजीवन का संसार।तेज तलवारों वाली माँ की जयकार,हर दिल में हो विश्वास और

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कर्मकांड पे व्यंग्य: रैप सॉन्ग (सरल शब्दों में)

आध्यात्म और भक्ति, हिंदी कविता

[Intro]पूजा-पाठ का मेला है,दिखावे का सब खेला है।गंगा में नहाया, पर मन में मैल,कर्मकांड में अटके, टोटल फैल। [Verse 1]सफेद कपड़ा, मन काला,धूप-बत्ती से क्या बदले लाला?पंडित बोले, “दान-दक्षिणा”,पाप से मुक्ति का ढोंग है साला। सुबह मंदिर, रात में ठेका,भक्ति कम, बस दिखावा फैला।मंत्र पढ़े, पर स्वार्थ छुपाए,भगवान से भी सौदा करवाए! [Hook]कर्मकांड, ओ कर्मकांड,भगवान

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स्त्री का स्वाभिमान: हिंदी कविता जो जगा दे चेतना

आध्यात्म और भक्ति

इस कविता में इस कविता में स्त्री का स्वाभिमान के भावपूर्ण स्वर के माध्यम से नारी की गरिमा, संघर्ष, आत्मबल और समकालीन समाज में उसकी पहचान को ओजपूर्ण अभिव्यक्ति दी गई है। भूमिका स्त्री का स्वाभिमान केवल एक भावना नहीं, वह अस्तित्व की जड़ है।वह मौन में भी गर्जना है, आँसुओं में भी अग्नि है।समय

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गुरू घासीदास जी

गुरू घासीदास जी पर हिंदी कविता

आध्यात्म और भक्ति

गुरू घासीदास छत्तीसगढ़ राज्य के रायपुर जिले के गिरौदपुरी गांव में पिता महंगुदास जी एवं माता अमरौतिन के यहाँ अवतरित हुये थे गुरू घासीदास जी सतनाम धर्म जिसे आम बोल चाल में सतनामी समाज कहा जाता है, के प्रवर्तक थे। विकिपीडिया गुरू घासीदास जी पर हिंदी कविता चलसंगी गिरौद जाबो, बबा के धाम हे ।गुरु के

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स्वामी विवेकानन्द : जागरण का महागान / मनीभाई नवरत्न

आध्यात्म और भक्ति

स्वामी विवेकानन्द : जागरण का महागान (अतुकांत, मौलिक कविता) भारत की भूमिवह तपोभूमि हैजहाँ ऋषियों की वाणीअभी भी वायु में गूँजती है।उसी भूमि नेउन्नीसवीं शताब्दी मेंएक ऐसी तेजस्वी आत्मा को जन्म दियाजिसने आत्मा की रोशनी सेसमूची मानवता को दिशा दी—स्वामी विवेकानन्द। वे केवल संन्यासी नहीं थे,वे आधुनिक युग के महर्षि थे—तर्क और श्रद्धा का अद्भुत

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सरदार पटेल

सरदार पटेल : अदम्य इच्छाशक्ति का पथ / मनीभाई नवरत्न

आध्यात्म और भक्ति

सरदार पटेल : अदम्य इच्छाशक्ति का पथ (अतुकांत कविता) राष्ट्र एक व्यक्ति के कारण महान नहीं होता,पर कभी-कभीएक व्यक्तिराष्ट्र की रीढ़ बन जाता है।कठोरता जिसे लोग कठोरता समझते हैं,वह भीतर जलते हुए कर्तव्य का ताप होता है।सरदार पटेलउसी ताप से बनेवही लौह बनाजिसने एक बिखरे देश कोएक धड़कन में जोड़ा। करमसद की मिट्टीसाधारण थीपर उससे

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Surdas

सूरदास : एक जागृति-यात्रा – मनीभाई नवरत्न

आध्यात्म और भक्ति, हिंदी कविता

सूरदास : एक जागृति-यात्रा (अतुकांत कविता) कविता का आरम्भ वहीं होता हैजहाँ मन प्रश्न करता है—दृष्टि का मूल्य क्या है?दिखाई देने वाली दुनिया बड़ी हैया भीतर जलती हुई अनुभूति?और तभी कोई सूरदास-सा मनुष्यएक अंधकार को रोशनी में बदल देता है। सीही हो या रुनकता—स्थान बदल जाता है,पर प्रतिभा का स्रोत नहीं।1540 के आसपास जन्मा एक

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शिवाजी : मेरे आदर्श पुरुष – मनीभाई नवरत्न

आध्यात्म और भक्ति, हिंदी कविता

शिवाजी : मेरे आदर्श पुरुष (अतुकांत कविता) भारत की धरा परजब अन्याय का अंधेरा गहराता गया,जब धर्म, संस्कृति और आत्मगौरवजकड़नों में सिसकने लगे—तभी उठे एक प्रकाश-पुरुष,एक ज्योति जो दिशा भी बनी और संघर्ष भी।यह ज्योति थी—मेरे आदर्श पुरुषछत्रपति शिवाजी महाराज। उनका जन्म शिबनेरी के किले में हुआ—पर वे किले की दीवारों तक सीमित न रहे।जीजामाता

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गुरु गोविन्दसिंह — मनीभाई नवरत्न

आध्यात्म और भक्ति, हिंदी कविता

गुरु गोविन्दसिंह — मनीभाई नवरत्न एक ओर शत्रुओं को तलवार से ललकारने वाला,दूसरी ओर कलम से काव्य के मोती बीनने वाला,हाथ पर बाज और हृदय में करुणा छिपाए,धर्म, मानवता और राष्ट्रधर्म के लिएअथक खड़े रहने वाला—वह विलक्षण पुरुष थे गुरु गोविन्दसिंह। पटना की धरती पर23 दिसम्बर 1666 को जन्मेएक प्रकाश…जो आगे चलकरभय और अन्याय के

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तुलसी विवाह पर कविता

आध्यात्म और भक्ति, हिंदी कविता

तुलसी विवाह पर कविता पौराणिक कथा पर आधारित है और वृंदा और भगवान विष्णु के अवतार जालंधर की कहानी को प्रस्तुत करती है। गंगा द्वारा श्रीहरि को श्राप देने से लक्ष्मी को धरती पर दो रूपों में जन्म लेना पड़ा – एक वृंदा के रूप में, जिसने कठिनाइयों का सामना किया और दूसरी पद्मा नदी

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कवि / कविता पर कविता/ राजकुमार ‘मसखरे

आध्यात्म और भक्ति

कवि / कविता पर कविता/ राजकुमार ‘मसखरे आज़कल  कवि  होते नही हैंवे सीधे ही  कवि बन जाते हैं,कुछ लिखने व मंथन से पहलेकोई  नकली  ‘नाम’ जमाते हैं ! यही कोई ‘उपनाम’ लिख करफिर नाम  मे ‘कवि’  लगाते हैं,दो,चार रचना क्या लिख डाले‘भाँटा-मुरई’ को सही बताते हैं ! ‘पताल चटनी’ लिख- लिख करये समृद्ध साहित्यकार कहाते

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