पुरुष को एक ओर रखो
आध्यात्म और भक्ति, हिंदी कवितापुरुष को एक ओर रखो स्त्री के संसार का केंद्रपुरुष नहीं होना चाहिए,और पुरुष के संसार का केंद्रस्त्री नहीं। यह व्यवस्थाजंगल की है,मनुष्यता की नहीं। जब तकशरीर, हार्मोन,मातृत्व,और घोंसलाजीवन का केंद्र बने रहते हैं,मुक्तिकेवल शब्द रह जाती है। जिस दिनशरीर मालिक नहीं रहता,उसी दिनपुरुष भीआसक्ति नहीं रहता। रुको,और खुद से पूछो—जिसे तुमइतना महत्वपूर्ण मान रही
पुरुष को एक ओर रखो Read More »



