अपने भीतर की शरारत पकड़ना
हिंदी कविताअपने भीतर की शरारत पकड़ना अपने ही भीतररंगे हाथों पकड़ लेना—इससे बड़ा मज़ाऔर क्या होगा? जब मनबिना पूछेकल्पनाओं में फिसलने लगे,तभी उसे पकड़ो। जब डरधीरे से कंधे परहाथ रखे,या असुरक्षाकान में फुसफुसाए—उसी क्षणरोशनी जला दो। ये सबअँधेरे के जीव हैं,ध्यान की एक किरणपड़ते हीसिकुड़ने लगते हैं। ईर्ष्या,चिंता,बिखरे विचार—इन्हें सुधारो मत,बस देखो। देखते हीइनकी पकड़ढीली पड़
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