[Intro]
पूजा-पाठ का मेला है,
दिखावे का सब खेला है।
गंगा में नहाया, पर मन में मैल,
कर्मकांड में अटके, टोटल फैल।
[Verse 1]
सफेद कपड़ा, मन काला,
धूप-बत्ती से क्या बदले लाला?
पंडित बोले, “दान-दक्षिणा”,
पाप से मुक्ति का ढोंग है साला।
सुबह मंदिर, रात में ठेका,
भक्ति कम, बस दिखावा फैला।
मंत्र पढ़े, पर स्वार्थ छुपाए,
भगवान से भी सौदा करवाए!
[Hook]
कर्मकांड, ओ कर्मकांड,
भगवान भी बोले, “क्यों ये ब्रांड?”
पैसा फेंको, आशीर्वाद लो,
जैसे दुकान से सामान लो।
[Verse 2]
गंगा में डुबकी, पाप बहाओ,
फिर वही गलती, सुधार लाओ?
भीड़ जुटाए मन का डर,
सोचें भगवान कहीं ना कर दें बिस्तर।
यज्ञ और हवन के बहाने,
प्यार-दया क्यों हो गए पुराने?
इंसान भूखा, घंटी बजे,
बस चढ़ावे से मंदिर सजे।
[Bridge]
दर्शन बस नाम के, दिल में धुआं,
क्यों बनाए ये दिखावे का जुड़ाव?
जो प्यार करे, वही असली भक्त,
बाकी सब ढोंग, बस बने नकली पथ।
[Hook]
कर्मकांड, ओ कर्मकांड,
भगवान भी बोले, “क्यों ये ब्रांड?”
पैसा फेंको, आशीर्वाद लो,
जैसे दुकान से सामान लो।
[Outro]
धर्म में दिल हो, कर्म में प्यार,
बस इतना ही है असली आधार।
कर्मकांड छोड़ो, दिल से जुड़ो,
प्यार और सेवा में ईश्वर ढूंढो।
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यह सॉन्ग सरल शब्दों में समझाता है कि धर्म का असली मतलब दिखावे में नहीं, बल्कि सच्ची इंसानियत और सेवा में है।





