माँ दंतेश्वरी के नाम ले, हिरदय म आस

मुखड़ा (Intro)

छत्तीसगढ़ के भुइयां म बिखरे उजास,
माँ दंतेश्वरी के नाम ले, हिरदय म आस।
नाचे धरती, गाए अम्बर,
नाचे धरती, गाए अम्बर,
और ढोलक की थाप,
गरबा संग खो जाए, जीवन संताप।

अंतरा 1 (Verse 1)

महुए की खुशबू संग, बहती बयार,
नाचा के कदमों में, नवजीवन का संसार।
तेज तलवारों वाली माँ की जयकार,
हर दिल में हो विश्वास और भक्ति अपार।”
नाचे धरती, गाए अम्बर,
नाचे धरती, गाए अम्बर,
और ढोलक की थाप,
गरबा संग खो जाए, जीवन संताप।

अंतरा 2 (Verse 2)

कोसा औ सिल्क सजे , रंग-बिरंगे लोग,
जगराता नाचा संग, लागे सुखद संजोग।
ढोल-नगाड़े के थाप से झूमे शहर-गाँव,
माँ भवानी के गुण गा, लेके सुंदर भाव।
नाचे धरती, गाए अम्बर,
नाचे धरती, गाए अम्बर,
और ढोलक की थाप,
गरबा संग खो जाए, जीवन संताप।

कोरस (Chorus)

आओ मिलके गावव, नाचव सुख बिसराव,
माँ दुर्गा के गरबा म , झूमे शहर गाँव गाँव!”
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