सुधार रणनीति नहीं
सच्चा सुधार तब शुरू होता है,
जब तुम अपने आप से झूठ बोलना बंद करो।
जब तुम अपनी स्थिति देखो
जैसी है वैसी—
बिना सजावट, बिना बहाने।
मूल्यांकन चुपचाप हो,
किसी को बताने की जरूरत नहीं।
घाव पहनने की जरूरत नहीं।
पर खुद को सच बताना ज़रूरी है।
जब स्पष्टता आती है,
परिवर्तन अपने आप होता है।
झूठ खुद टूट जाता है।
द्वार खुल जाता है।
सुधार का कोई तय लक्ष्य नहीं।
पुरानी इच्छा पूरी करना नहीं।
सफलता या खुशी की रणनीति नहीं।
बस एक निर्णय—
इस भीतर के गंदगी से मुक्त होना।
कोई मोलभाव नहीं।
कोई शर्त नहीं।
साफ़, ईमानदार इरादा—
यहीं से असली परिवर्तन शुरू होता है।





