क्षुद्र को जाने दो (Let the Petty Go)
यदि तुम्हारा आत्म-मूल्य
किसी भी चीज़ पर टिका है,
तो जीवन
उसे डोरियों की तरह हिलाएगा,
और तुम्हें
कठपुतली बना देगा।
परिस्थितियाँ,
संपत्ति,
उपलब्धियाँ,
मंज़िलें—
इनमें से किसी को
अपने नाम की परिभाषा मत बनने दो।
जो बाहर है
वह ठहरता नहीं।
जो ठहरता नहीं,
उस पर आत्म-मूल्य टिकाना
स्वयं को अस्थिर करना है।
आत्म-मूल्य भी एक विचार है,
और हर विचार
किसी दूसरे सहारे पर जीता है।
सहारा बदला—
तो तुम बदल गए।
आज जीवन उठाता है,
तुम ऊँचे हो जाते हो।
कल गिराता है,
तुम छोटे हो जाते हो।
यह खेल
थका देता है।
एक गहरी स्वतंत्रता है
इस बोझ से मुक्त हो जाना—
दुनिया की कसौटियों पर
खुद को तौलने से मुक्त।
क्षुद्र को जाने दो।
माप को जाने दो।
तुलना को जाने दो।
और देखो—
कैसे बिना किसी पैमाने के
जीवन
हल्का हो जाता है।





