कोई विश्वास पवित्र नहीं
हिंदी कविताकोई विश्वास पवित्र नहीं मैंने देखा एक रोगी—खुलकर बोला, “दवा नहीं चाहिए,मुझे अपनी बीमारी प्यारी है।”कम से कम वह अपने पागलपन में ईमानदार था। पर अधिक खतरनाक है वह,जो मान लेता है कि बीमार है,फिर झूठी दवा थाम लेता है,और मुस्कुराता है,जैसे वह ठीक हो रहा हो।वह न केवल बीमार है,बल्कि चालाक भी है।और उसकी
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