मनीभाई नवरत्न

यह काव्य रचना छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के बसना ब्लाक क्षेत्र के मनीभाई नवरत्न द्वारा रचित है। अभी आप कई ब्लॉग पर लेखन कर रहे हैं। आप कविता बहार के संस्थापक और संचालक भी है । अभी आप कविता बहार पब्लिकेशन में संपादन और पृष्ठीय साजसज्जा का दायित्व भी निभा रहे हैं । हाइकु मञ्जूषा, हाइकु की सुगंध ,छत्तीसगढ़ सम्पूर्ण दर्शन , चारू चिन्मय चोका आदि पुस्तकों में रचना प्रकाशित हो चुकी हैं।

धूल का पांडुलिपि: मनीभाई नवरत्न की मार्मिक कविता | भावनात्मक हिंदी कविता

समाज और यथार्थ

मनीभाई नवरत्न की कविता “धूल का पांडुलिपि” एक लेखक की अनकही कहानी बयान करती है, जो समाज की सच्चाई को शब्दों में पिरोती है। पढ़ें यह भावनात्मक और विचारोत्तेजक रचना। कविता का उद्देश्य “धूल का पांडुलिपि” कविता का उद्देश्य समाज में व्याप्त असमानता, उपेक्षा और मानवीय संवेदनाओं की अनदेखी को उजागर करना है। यह एक […]

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मैं कौन? मनीभाई नवरत्न की आत्मचिंतन से भरी दार्शनिक हिंदी कविता

समाज और यथार्थ

मनीभाई नवरत्न की कविता “मैं कौन?” आत्म-पहचान और जीवन के गहन सवालों को उजागर करती है। यह दार्शनिक रचना आपको स्वयं की खोज और शून्यता के सत्य की ओर ले जाती है। कविता का उद्देश्य “मैं कौन?” एक गहन दार्शनिक कविता है जो मानव जीवन में आत्म-पहचान के प्रश्न को आध्यात्मिक और चिंतनशील दृष्टिकोण से

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दीपोत्सव का आत्मप्रकाश

समाज और यथार्थ

दीपोत्सव का आत्मप्रकाश(एक आध्यात्मिक कविता) हर वर्ष आता दीप पर्व, लाता रोशनी का संदेश,पर क्या जलाया अंतर्मन, या फिर दीप विशेष?भीतर झांको, पूछो खुद से, क्या बढ़ा है ज्ञान?या अब भी छाया है भीतर, अज्ञान का संधान? निरंतर आत्म-मूल्यांकन, यही है सच्ची दीवाली,हर क्षण खुद को देखो तुम, ना हो आंतरिक खाली।बाहर की चकाचौंध व्यर्थ

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ब्रह्मचर्य का सत्य: मनीभाई नवरत्न की आध्यात्मिक हिंदी कविता | गहन दार्शनिक रचना

समाज और यथार्थ

मनीभाई नवरत्न की कविता “ब्रह्मचर्य का सत्य” आत्म-संयम और आध्यात्मिक जागृति की गहन खोज करती है। पढ़ें यह प्रेरक और दार्शनिक रचना जो आत्मा की शुद्धता और सत्य की ओर ले जाती है।

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स्वप्नों के पार -मनीभाई नवरत्न

हिंदी कविता

स्वप्नों के पार सपनों की इस बगिया में, छिपा है एक रहस्य,नयन मूँदते ही खुलता, अंतरतम का दर्पण विशेष्य।जहाँ न कोई सीमा होती, न बंधन का नाम,केवल भाव बहते रहते, अंतर्मन की ध्वनि संग्राम।। चेतन की सीमाओं से, जब मन आगे जाए,अवचेतन की गहराई में, नयी दुनिया दिख जाए।वहाँ दबे हुए स्वप्नों का, होता है

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मातृभाषा बनाम माध्यम

हिंदी कविता

मातृभाषा बनाम माध्यम में शिक्षा का असली उद्देश्य क्या है? क्या अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाना ही शिक्षा का मापदंड है? और इसके क्या समाधान हो सकते हैं ? इस पर प्रकाश डालने की कोशिश की गई है । आज भारत में शिक्षा का अर्थ, माध्यम पर भारी होता जा रहा है। शहरों में दूर और

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मैं जग-जीवन का भार लिए फिरता हूँ- मनीभाई नवरत्न

हिंदी कविता

मैं जग-जीवन का भार लिए फिरता हूँ,फिर भी जीवन में प्यार लिए फिरता हूँ;कर दिया किसी ने झंकृत जिनको छूकरमैं साँसों के दो तार लिए फिरता हूँ। मैं स्नेह-सुरा का पान किया करता हूँ,मैं कभी न जग का ध्यान किया करता हूँ,जग पूछ रहा उनको, जो जग की गाते,मैं अपने मन का गान किया करता

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दरिद्र कौन / पद्ममुख पंडा

हिंदी कविता

“दरिद्र कौन” कविता, कवि पद्ममुख पंडा द्वारा रचित है। यह कविता उन लोगों पर आधारित है जो वास्तविक दरिद्रता (गरीबी) और स्वाभिमान को पहचानते हैं। इसमें कवि यह संदेश देने की कोशिश करते हैं कि दरिद्रता केवल धन की कमी नहीं होती, बल्कि नैतिक मूल्यों, दया और संवेदना की कमी भी दरिद्रता का रूप होती

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विज्ञान हर जगह की बुनियाद/ मनीभाई नवरत्न

विज्ञान, तकनीक और भविष्य, ,

विज्ञान की महिमा को सलाम करती यह कविता छात्रों में जिज्ञासा और सीखने की प्रेरणा जगाने के लिए लिखी गई है।यह रही विज्ञान पर एक कविता: विज्ञान है वो रोशनी,जो हर अंधेरे को मिटाती है,ज्ञान की किरण बनकर,सच की राह दिखाती है। प्रकृति के रहस्यों को,खोलती है विज्ञान की किताब,हर सवाल का उत्तर,ढूंढती है इसका

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शादी का चक्कर-कैसे दोगे ओलंपिक में टक्कर / मनीभाई नवरत्न

हास्य और व्यंग्य, हिंदी कविता

“शादी का चक्कर, कैसे दोगे ओलंपिक में टक्कर” मनीभाई नवरत्न का एक मजेदार और व्यंग्यात्मक रैप सांग है। यह गाना युवाओं और खेल प्रेमियों के बीच खासा लोकप्रिय है, और इसकी लाइनें अक्सर लोगों को हंसा देती हैं। इस रैप सांग का मुख्य उद्देश्य शादी और खेल के बीच तुलना करके हास्य उत्पन्न करना है।

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manibhai Navratna

राखी का बंधन/ मनीभाई नवरत्न

मन और भावनाएँ

गीतकार : मनीभाई नवरत्न गीत: “राखी का बंधन”** अंतरा 1:(brother voice)राखी का बंधन है, रिश्तों की पूजा , रिश्तों के इस धागे में, प्यार है छुपा ।(sister voice)तू है मेरा भाई, तू ही मेरा साया, मेरे इस जीवन को, खुशी से सजाया। कोरस:* रिश्तों की इस डोर में, बंधा है दिल हमारा, बहना के बिना

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Bhagat_Singh

भगत सिंह तुम्हारा नाम अमर / मनीभाई नवरत्न

हिंदी कविता

भगत सिंह तुम्हारा नाम अमर (Intro)देश की माटी का सपूत था वो,अंग्रेज़ों के लिए काल था।कभी डरते ना, कभी ना झुकते थे,आजादी का मिसाल था । (Chorus)भगत सिंह, भगत सिंह, तुम्हारा नाम अमरतुम्हारे शौर्य वीरता को, गाता है घर घर। भगत सिंह, भगत सिंह, तुम्हारा नाम अमर ,तुम्हारे शौर्य वीरता को, गाता है घर घर।

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