हास्य और व्यंग्य

राउत नाचा पर कविता

हास्य और व्यंग्य, हिंदी कविता

शिवकुमार श्रीवास “लहरी” छत्तीसगढ़ के एक प्रसिद्ध कवि हैं। उनकी यह कविता “राउत नाचा” छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति और विशेषकर राउत नाच पर केंद्रित है। राउत नाच छत्तीसगढ़ का एक लोकप्रिय नृत्य है जो अपनी अनूठी शैली और सांस्कृतिक महत्व के लिए जाना जाता है। कवि ने इस कविता के माध्यम से राउत नाच […]

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शादी का चक्कर-कैसे दोगे ओलंपिक में टक्कर / मनीभाई नवरत्न

हास्य और व्यंग्य, हिंदी कविता

“शादी का चक्कर, कैसे दोगे ओलंपिक में टक्कर” मनीभाई नवरत्न का एक मजेदार और व्यंग्यात्मक रैप सांग है। यह गाना युवाओं और खेल प्रेमियों के बीच खासा लोकप्रिय है, और इसकी लाइनें अक्सर लोगों को हंसा देती हैं। इस रैप सांग का मुख्य उद्देश्य शादी और खेल के बीच तुलना करके हास्य उत्पन्न करना है।

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हिंदी हास्य कविता संग्रह (Hasya Kavita in Hindi)

हास्य और व्यंग्य, हिंदी कविता

Popular Hasya Kavita in Hindi: नमस्कार पाठकों , यहां पर हमने हिंदी हास्य कविता संग्रह की है। यह हिंदी हास्य कविता (Hindi Hasya Kavita) बहुत ही प्रसिद्ध कवियों द्वारा रचित है। उम्मीद करते हैं आपको यह हास्य कविता (hindi funny poem) पसंद आयेगी। इन्हें आगे शेयर जरूर करें। हिंदी हास्य कविता कुछ तो स्टैंडर्ड बनाओ प्रकृति बदलती क्षण-क्षण

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जवाहरलाल नेहरू

विश्व बाल दिवस पर कविता

महत्वपूर्ण दिन आधारित कविता, हास्य और व्यंग्य, ,

विश्व बाल दिवस पर दोहा:- बाल दिवस पर विश्व में,हों जलसे भरपूर!बच्चों का अधिकार है,बचपन क्यों हो दूर!!१ कवि , ऐसा साहित्य रच,बचपन हो साकार!हर बालक को मिल सके,मूलभूत अधिकार!!२ बाल श्रमिक,भिक्षुक बने,बँधुआ सम मजदूर!उनके हक की बात हो,जो बालक मजबूर!! ३ बाबूलाल शर्मा अलबेला बचपन पर हास्य कविता मेरा बचपन बड़ा निराला,कुचमादों का डेरा

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मनीभाई नवरत्न की हिंदी कवितायें

हास्य और व्यंग्य, हिंदी कविता

मनीभाई नवरत्न की हिंदी कवितायें मनीभाई नवरत्न के कविता मौत मौत क्या है ?जलती लौ का बुझ जाना।या राख हो मिट्टी में मिलना । बड़ी भयानक है ना मौत ?यह सोच ही रूह कांप उठती,कि सभी को न्योता मिलेगामौत का ,एक दिन । मौत से इतना डर क्यों ?क्या कोई इसे जानता ?एकदम करीब से

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1 मई अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस 1 May International Labor Day

मजदूर की दशा पर हास्य व्यंग्य – मोहम्मद अलीम

हास्य और व्यंग्य, हिंदी कविता

अंतर्राष्ट्रीय मज़दूर दिवस या मई दिन मनाने की शुरूआत 1 मई 1886 से मानी जाती है जब अमेरिका की मज़दूर यूनियनों नें काम का समय 8 घंटे से ज़्यादा न रखे जाने के लिए हड़ताल की थी। किसी भी समाज, देश, संस्था और उद्योग में मज़दूरों, कामगारों और मेहनतकशों की अहम भूमिका होती है।

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स्कूल चलें हम – अकिल खान

हास्य और व्यंग्य, हिंदी कविता

स्कूल चलें हम – अकिल खान है नन्हें पैर मेरे,हौसला अफजाई बढ़ाने को,जाता हूँ स्कूल पढ़ने,इस मन को पढ़ाने को।हूं अडिग,एक नया अध्याय लिखने को,जाता हूं स्कूल शिक्षा-ज्ञान सीखने को।शिक्षा से दूर करूं,मैं अशिक्षा का भ्रम,गढ़ने एक नया अध्याय,स्कूल चलें हम। शिक्षक का डांट,मुझे एक नई राह दिखाता है,पुस्तक,कॉपी,कलम,मुझे सीखना सिखाता है।कभी अज्ञानता से पग

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हास्य कविता-शादी की सालगिरह

हास्य और व्यंग्य, हिंदी कविता

हास्य कविता-शादी की सालगिरह आते ही शादी की सालगिरहपत्नी जी मुस्काईकहने लगीमेरे हमसफर आपको बधाई पति महोदय बधाई पाकरसर खुजाने लगेझंडू बाम सर में लगाने लगे पत्नी बोलीख़ुशी के दिन आपको भलाक्या हो जाता हैबधाई देने परसर दर्द उमड़ आता है पति बोले-अरे भाग्यवानशादी के लिएमुश्किल से धन जुटाया थाबैंड बाजे बाराती मेंधन लुटाया था

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संगीत का दीवाना -अकिल खान

हास्य और व्यंग्य, हिंदी कविता

संगीत का दीवाना जब मन हो उदास तो, तुम सुन लेना संगीत, अपने हताश मन में खुशी कर लेना अंकित। खाली है जीवन तो भरलो संगीत का खजाना, यही है समझाना हर कोई , संगीत का दीवाना। विचलित हो जीवन तो संगीत काम आए, गम सारे भाग जाऐ जब कोई संगीत सुनाऐ। संगीत से है

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जीवन और संगीत है एक दूसरे के पूरक

हास्य और व्यंग्य, हिंदी कविता

जीवन और संगीत है एक दूसरे के पूरक जीवन और संगीत है एक दूसरे के पूरक।संगीत है हर समय और स्थिति की जरूरत। लोरी है जीवन का पहला संगीत। प्रकृति की हर वस्तु में जीवन का उदगीत। ईश्वर की भक्ति में संगीत। माता की शक्ति में संगीत। मंदिर के शंखनाद में संगीत। मस्जिद की अजान

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आज जिंदगी बेमानी हो गई है – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

हास्य और व्यंग्य, हिंदी कविता

इस कविता में वर्तमान सामाजिक परिदृश्य को समाहित किया गया है |
आज जिंदगी बेमानी हो गई है – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

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जिंदगी- कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

हास्य और व्यंग्य, हिंदी कविता

इस कविता के माध्यम से जिन्दगी में होते उतार – चढ़ाव , मुश्किलों से सामना करते हुए आगे बढ़ने को प्रेरित किया गया है |
जिंदगी- कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

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