1 मई अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस हिंदी कविता

1 मई, या मई में पहला सोमवार, कई देशों में राष्ट्रीय सार्वजनिक अवकाश होता है , ज्यादातर मामलों में “अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस” ​​​​या इसी तरह के नाम के रूप में। कुछ देश अपने लिए महत्वपूर्ण अन्य तिथियों पर मजदूर दिवस मनाते हैं

1 मई अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस 1 May International Labor Day

मजदूर की दशा पर कविता

समाज और यथार्थ

मजदूरों के नाम समर्पित यह दिन 1 मई है। मजदूर दिवस को लेबर डे, श्रमिक दिवस या मई डे के नाम से भी जाना जाता है। श्रमिकों के सम्मान के साथ ही मजदूरों के अधिकारों के लिए आवाज उठाने के उद्देश्य से भी इस दिन को मनाते हैं, ताकि मजदूरों की स्थिति समाज में मजबूत हो […]

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1 मई अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस 1 May International Labor Day

मजदूर की दशा पर हास्य व्यंग्य – मोहम्मद अलीम

हास्य और व्यंग्य, हिंदी कविता

अंतर्राष्ट्रीय मज़दूर दिवस या मई दिन मनाने की शुरूआत 1 मई 1886 से मानी जाती है जब अमेरिका की मज़दूर यूनियनों नें काम का समय 8 घंटे से ज़्यादा न रखे जाने के लिए हड़ताल की थी। किसी भी समाज, देश, संस्था और उद्योग में मज़दूरों, कामगारों और मेहनतकशों की अहम भूमिका होती है।

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श्रम श्वेद- बाबूलाल शर्मा (ताटंक छंद)

हिंदी कविता

ताटंक छंद ~विधान :- १६, १४ मात्राभारदो दो चरण ~ समतुकांत,चार चरण का ~ छंदतुकांत में गुरु गुरु गुरु,२२२ हो। श्रम श्वेद- बाबूलाल शर्मा (ताटंक छंद) बने नींव की ईंट श्रमी जो,गिरा श्वेद मीनारों में।स्वप्न अश्रु मिलकर गारे में।चुने गये दीवारों में।श्वेद नींव में दीवारों में,होता मिला दुकानों में।महल किले आवास सभी के,रहता मिला मकानों

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1 मई अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस 1 May International Labor Day

आखिर हम मजदूर है- कविता, महदीप जंघेल

हिंदी कविता

मजदूर विश्व निर्माता है। संसार में उसके बिना विकास कार्य संभव नहीं है। मजदूर श्रम के पुजारी है। उन्हें मेरा नमन है।

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श्रमिक-विकास की बुनियाद पर कविता

हिंदी कविता

श्रमिक-विकास की बुनियाद पर कविता सूरज की पहली किरण से काम पर लग जाता हूँ।ढलते सूरज की किरणों संग वापस घर को आता हूँ।अपने घर परिवार के लिए,शरीर की चिंता छोड़ मैं।हवा,पानी,धूप,छांह को हँसकर सह जाता हूँ।।1।। नव निर्माण,नव विहान की शुरुआत हूँ मैं।देश के विकास की पहली ईंट बुनियाद हूँ मैं।सोचता हूँ गढ़ रहा

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परिश्रम पर कविता

हिंदी कविता

परिश्रम पर कविता वो मेहनतकशकरता रहा कड़ा परिश्रमफिर भी रहा अभावग्रस्तउसके श्रमफल परकरते रहे अय्याशीपूंजीपतिधर्म के नाम परकरते रहे शोषणधर्म के ठेकेदारसमानता के नाम परबटोरते रहे वोटकुटिल सियासतदानमेहनतकश के हालातरहे जस के तसजबकि उसके हक मेंलगते रहे नारेबनते रहे संगठनहोती रही राजनीतिआज तलक -विनोद सिल्ला©

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हे धरती के भगवान

हिंदी कविता

हे धरती के भगवान हो तुम आसाधारण,तेरे कांधों पर दुनिया टिका है,तेरे खून के कतरे से ही  ,ये पावन धरती भिंगा है !!हे धरती के भगवान ,तु है बड़ा महान !! ऊसर भूमि उपजाऊ कर देता,कठोरता खुद हर लेता ,नित नव जुनून कुछ करने का ,कभी न सोचा स्वयं रखने का ,कमा-कमा कर तू रे

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