फ़िल्म समीक्षा ‘कलयुग’ : श्याम बेनेगल (1981)

फ़िल्म समीक्षा 'कलयुग' : श्याम बेनेगल (1981) महाभारत की कथा विघटित होते गण समाजों और विकसित होते राजसत्ता के दौर की कहानी है। यह अपने यथार्थवादी दृष्टिकोण के लिए भी…

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नवदुर्गा पर दोहा – बाबूलाल शर्मा

नवदुर्गा पर दोहा . ~ १ ~मात शैल पुत्री प्रथम, कर पूजन नवरात।घट स्थापन पूजा करें, मिले सर्व सौगात।।. ~ २ ~ब्रह्मचारिणी रूप माँ, दिवस दूसरे जान।शक्ति मिलेगी भक्ति से,…

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तीसरी कसम : न कोई इस पार हमार न कोई उस पार

तीसरी कसम : न कोई इस पार हमारा न कोई उस पार रेणु की चर्चित कहानी 'तीसरी कसम उर्फ़ मारे गए गुलफ़ाम' पर आधारित फ़िल्म 'तीसरी कसम'(1966) की काफ़ी चर्चा…

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आधे-अधूरे : पूर्णता की तलाश बेमानी है

आधे-अधूरे : पूर्णता की तलाश बेमानी है मोहन राकेश जी का यह नाटक अपने पहले मंचन(1969) से ही चर्चित रहा है.तब से अब तक अलग-अलग निर्देशकों और कलाकारों द्वारा इसका…

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राष्ट्रभाषा पर छंद – बाबूराम सिंह

राष्ट्र भाषा पर छंद सुखद हिन्द महान बनाइए।मधुर बोल सदैव अपनाइए।प्रगति कारक भारत हो तभी।सरस काम करें अपना सभी।अजब ज्ञान भरें शुभदा लिए।सहज भावभरोस भव्य किए।गुण सभी इसमें जग आगरी।लखअमोलक…

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शिक्षा ज्ञान का दीपक है कविता -बाबूराम सिंह

शिक्षा ज्ञान का दीपक है कविता सौभाग्यसे मिलाहै नरतन इसे सुफल बनाओ।शिक्षा ज्ञान का दीपकहै सरस सदा अपनाओ।।बिनविद्या नर पशु समहै कहती दुनियां सारीछाया रहता जीवन है में चहुँदिश अँधियारी।ज्ञान…

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पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की जयंती पर कविता – उपमेंद्र सक्सेना

पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की जयंती पर कविता दिखा गए जो मार्ग यहाँ वे, उसको सब अपनाएँदीनदयाल उपाध्याय जी को हम भुला न पाएँ।सन् उन्निस सौ सोलह में पच्चीस सितंबर…

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मां दुर्गा पर कविता – बाबूराम सिंह

मातेश्वरी तूं धन्य हो ------------------------------नित चरणों में रहे श्रध्दाभाव वर दो भक्ति अनन्य हो। मातेश्वरी तूं धन्य हो।।अज-जग में सर्वत्र माँ मै सुचि पांव की धूल रहूँ।सुवासित हो माता जीवन…

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बेटी पर कविता – सुशी सक्सेना

मेरी बिटियामेरी बिटिया, मेरे घर की शान है।मेरे जीने का मकसद, मेरी जान है।पता ही न चला, कब बड़ी हो गई,मेरी बिटिया अपने पैरों पे खड़ी हो गई,मेरे लिए अब…

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दुर्गा मैया पर कविता – सुशी सक्सेना

दुर्गा मैया पर कविताआओ मईया मेरी, शेर पर होकर सवार।क्या हो गया है, देखो तेरे जगत का हाल।जाओ मईया जरा उस दिशा की ओर,नफ़रत के सिवा जहां, नहीं कुछ और,आपस…

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