आत्मा-अवलोकन
हिंदी कविताहम डरते रहे आत्मा-अवलोकन से,इस भ्रम में किजैसे ही सच मान लिया,कोई हाथ में पोछा थमा देगाऔर कहेगा —“अब साफ करो,यह तुम्हारी ही गंदगी है।” हम थक चुके थेदोष ढोते-ढोते,इसलिए सच से भीकाम की तरह डरते थे।फिर एक वाक्य आया—कठोर नहीं,पर निर्विवाद:“जैसे ही बंधन स्वीकारे जाते हैं,आप वही नहीं रहते।”कोई समाधान नहीं दिया गया,कोई विधि […]





