कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

सवाल / मनीभाई नवरत्न

हिंदी कविता

सवाल (अतुकांत कविता) सवालवह नहीं जो किताब में छपा हो,सवाल वह हैजो मन में चुभे। सवालवह नहीं जो उत्तर माँगे,सवाल वह हैजो नींद छीन ले। जब बाहर ठीक दिखता हो,और भीतर कुछ ठीक न लगे—वहीं सेसवाल जन्म लेता है। सवालभीड़ से नहीं आता,सवालअकेलेपन मेंखुद से टकराकरउभरता है। जो कहा गया हैउसे मान लेना आसान है,पर“क्यों?” […]

सवाल / मनीभाई नवरत्न Read More »

अस्तित्व

अस्तित्व (अतुकांत कविता)

हिंदी कविता

अस्तित्व (अतुकांत कविता) मैं नाम लेकर पैदा नहीं हुआ,नाम मुझे दिया गया।मैं रास्ता लेकर नहीं आया,चलते-चलते मैंने पगडंडी बनाई। किसी ईश्वर ने मेरी पटकथा नहीं लिखी,किसी भाग्य ने मेरी सीमा तय नहीं की।मैं हर क्षणअपने ही हाथों सेअपने होने की परिभाषा लिखता रहा। लोग कहते हैं—“तू ऐसा ही है”पर मैं जानता हूँ,मैं वैसा नहीं हूँ—मैं

अस्तित्व (अतुकांत कविता) Read More »

गुरू घासीदास जी

गुरू घासीदास जी पर हिंदी कविता

आध्यात्म और भक्ति

गुरू घासीदास छत्तीसगढ़ राज्य के रायपुर जिले के गिरौदपुरी गांव में पिता महंगुदास जी एवं माता अमरौतिन के यहाँ अवतरित हुये थे गुरू घासीदास जी सतनाम धर्म जिसे आम बोल चाल में सतनामी समाज कहा जाता है, के प्रवर्तक थे। विकिपीडिया गुरू घासीदास जी पर हिंदी कविता चलसंगी गिरौद जाबो, बबा के धाम हे ।गुरु के

गुरू घासीदास जी पर हिंदी कविता Read More »

कुछ तो स्टैंडर्ड बनाओ

समाज और यथार्थ

यह कविता आधुनिक समाज की सोच, जीवन-शैली और दिखावटी प्रगति पर तीखा, व्यंग्यात्मक और विचारोत्तेजक प्रहार है। कवि आज के व्यक्ति को आईना दिखाता है, जो तकनीक, ट्रेंड और तथाकथित सफलता में उलझकर जीवन के मूल अर्थ से दूर होता जा रहा है।

कुछ तो स्टैंडर्ड बनाओ Read More »

लाओ–सू : मार्ग का महागुरु -मनीभाई नवरत्न

समाज और यथार्थ

लाओ–सू : मार्ग का महागुरु प्राचीन चीन के धूसर बादलोंऔर शांत पर्वतों के बीचएक आत्मा जन्मी—जिसे संसार ने पुकारा—लाओ–सू,अर्थात् “आदरणीय वृद्ध गुरु”। इतिहास धुँधला है,समय की धूल पन्नों पर जमी है—कुछ कहते—वह मिथक था,कुछ कहते—कई महान आत्माओं काएक संयुक्त स्वरूप।पर सत्य यह है—ज्ञान जब जन्म लेता है,तो व्यक्ति नहीं, विचार बनकर जीता है। कहते हैं—वह

लाओ–सू : मार्ग का महागुरु -मनीभाई नवरत्न Read More »

अष्टावक्र : ज्ञान का उजियारा - मनीभाई नवरत्न

अष्टावक्र : ज्ञान का उजियारा – मनीभाई नवरत्न

हिंदी कविता

अष्टावक्र : ज्ञान का उजियारा गर्भ से ही सत्य बोलने काजिसे वरदान मिला,वह था अष्टावक्र—आठ वक्रों वाला,पर भीतर सेअद्भुत तेज लियेजन्मा एक बाल ऋषि। पिता कहोड़ वेद पढ़ाते,पर एक दिन उच्चारण में त्रुटि हुई—और गर्भ में पलता बालकजैसे ही बोला—“पिताजी, यह पाठ गलत है”—तो क्रोध में दुखित मन नेउसे शाप दे दिया—“टेढ़ा होगा तू आठ

अष्टावक्र : ज्ञान का उजियारा – मनीभाई नवरत्न Read More »

चार्ल्स डार्विन : प्रकृति का अन्वेषक – मनीभाई नवरत्न

प्रकृति और पर्यावरण, हिंदी कविता

चार्ल्स डार्विन : प्रकृति का अन्वेषक बारह फ़रवरी की सुबहएक बालक जन्मा इंग्लैंड में—शांत, सरल, परआँखों में छिपा थाअनवरत खोज का प्रकाश। उसके मन में प्रश्न थे—पेड़ क्यों बढ़ते हैं?पक्षी क्यों बदलते हैं?कछुओं के खोल अलग क्यों?फूलों के रंग भिन्न क्यों?और जीवन इतना विविधफिर भी एक जैसा क्यों? डार्विन—जिसने इन प्रश्नों कोवैज्ञानिक साहस में बदला।

चार्ल्स डार्विन : प्रकृति का अन्वेषक – मनीभाई नवरत्न Read More »

अरस्तू

अरस्तू : ज्ञान का आकाश – मनीभाई नवरत्न

समय और जीवन दर्शन

अरस्तू : ज्ञान का आकाश — एक प्रेरक, दीर्घ, मौलिक कविता स्टैगिरा की मिट्टी मेंएक बालक जन्मा—शांत-सा, जिज्ञासु-सा,पर दृष्टि में छिपी थीविचारों की बिजली। उसके पिताराजदरबार के वैद्य थे,इसलिए राजमहलों की छायाउसके बचपन पर पड़ी,पर उस बालक का मनवैभव में नहीं,विचारों की खोज में रम गया। अरस्तू—जिसका नामआज भी ज्ञान के आकाश परध्रुवतारे-सा स्थिर है।

अरस्तू : ज्ञान का आकाश – मनीभाई नवरत्न Read More »

सुकरात

सुकरात : सत्य का साहस / मनीभाई नवरत्न

हिंदी कविता

सुकरात : सत्य का साहस (मौलिक प्रेरक कविता) एथेंस की गलियों मेंएक साधारण-सा व्यक्तिनंगे पाँव चलता था—कपड़ा फटा हुआ,चेहरा साधारण,पर विचार अप्रतिम। वह रुकता,लोगों से प्रश्न करता,फिर मुस्कुराकर कहता—“मैं कुछ नहीं जानता,बस इतना जानता हूँकि मैं अज्ञानी हूँ।” और इसी स्वीकार सेवह जगत कासबसे बड़ा ज्ञानी बन गया। सुकरात—जिसने ज्ञान कोशब्दों में नहीं,प्रश्नों में खोजा।

सुकरात : सत्य का साहस / मनीभाई नवरत्न Read More »

अस्तित्व

जिज्ञासा – मनीभाई नवरत्न

विज्ञान, तकनीक और भविष्य

जिज्ञासा / विज्ञान विषय पर कविता (लंबी प्रेरक कविता) जिज्ञासा—मन के भीतर जन्म लेने वालीवह छोटी-सी चिनगारी हैजो साधारण-से इंसान कोअसाधारण बनने की राह दिखाती है। यह एक प्रश्न से शुरू होती है—“यह ऐसा क्यों है?”और फिरप्रश्नों की यह श्रृंखलाइतनी लंबी हो जाती हैकि एक दिनवह पूरी दुनिया को बदल देती है। जिज्ञासा ही तो

जिज्ञासा – मनीभाई नवरत्न Read More »

स्वामी विवेकानन्द : जागरण का महागान / मनीभाई नवरत्न

आध्यात्म और भक्ति

स्वामी विवेकानन्द : जागरण का महागान (अतुकांत, मौलिक कविता) भारत की भूमिवह तपोभूमि हैजहाँ ऋषियों की वाणीअभी भी वायु में गूँजती है।उसी भूमि नेउन्नीसवीं शताब्दी मेंएक ऐसी तेजस्वी आत्मा को जन्म दियाजिसने आत्मा की रोशनी सेसमूची मानवता को दिशा दी—स्वामी विवेकानन्द। वे केवल संन्यासी नहीं थे,वे आधुनिक युग के महर्षि थे—तर्क और श्रद्धा का अद्भुत

स्वामी विवेकानन्द : जागरण का महागान / मनीभाई नवरत्न Read More »

सुभाषचन्द्र बोस

सुभाषचन्द्र बोस : एक अक्षय अग्नि / मनीभाई नवरत्न

हिंदी कविता

सुभाषचन्द्र बोस : एक अक्षय अग्नि (अतुकांत कविता) इतिहास कभी–कभीएक ऐसे व्यक्तित्व को जन्म देता हैजो केवल घटनाओं का हिस्सा नहीं होता,बल्कि स्वयंनयी दिशा देता है।सुभाषचन्द्र बोसऐसे ही पुरुष थे—जो मृत्यु के बाद भीयुवाओं की नसों मेंविद्रोह की गर्मी जगाते रहे। साहसउनका परिचय नहीं,उनकी धड़कन था।इसीलिए वे ‘नेताजी’ हुए—मरकर भी जीवित,चुप रहकर भी बोलते हुए।

सुभाषचन्द्र बोस : एक अक्षय अग्नि / मनीभाई नवरत्न Read More »

Scroll to Top