KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

ऐसा होता  है परिवार- शिवांशी यादव

ऐसा होता  है परिवार- शिवांशी यादव माँ-बाप का प्यार है परिवार भाई-बहन का दुलार है परिवारएकता का प्रतीक है परिवारऐसा होता है परिवार।जिंदगी जीना…

रोग बड़ा कोरोना आया- बाबा कल्पनेश की कविता

रोग बड़ा कोरोना आया रोग बड़ा कोरोना आया,लाया भारी हाहाकार।रुदन-रुदन बस रुदन चतुर्दिक्,छाया प्रातः ही अँधियार।।बंद सभी दरवाजे देखे,मिलने जुलने पर…

कोरोना काल- मधुसिंघी

कोरोना काल- मधुसिंघी जो भी सोचें समझें पहले , जीवन की उपयोगी शाम।।काल मिला हमको चिंतन का , सोच समझकर करना काम।मानव जाति पड़ी संकट में , हाहाकार करे…

कोरोना अब तुम कब जाओगे?

कोरोना अब तुम कब जाओगे? इतना तो सता लिया हमेंऔर कितना सताओगेकोरोना, सच-सच बतलानाअब तुम कब जाओगे ? जिस किसी को पाश में जकड़ातो पहले उसका गला…

नंदा जाही का संगी -सुशील कुमार राजहंस

नंदा जाही का संगी -सुशील कुमार राजहंस हां संगवारी धीरे धीरे सब नंदात हे।मनखे मशीन के चक्कर म फंदात हे।किसानी के जम्मो काम अब इहि ले हो जात हे।कोनो…

काँटों में राह बनाते हैं -रामधारी सिंह ‘दिनकर’

काँटों में राह बनाते हैं सच है विपत्ति जब आती हैकायर को ही दहलाती हैसूरमा नहीं विचलित होतेक्षण एक नहीं धीरज खोते,विघ्नों को गले लगाते हैं।काँटों…

सफ़ेद कपड़ों में लिपटी हुई देवी (विश्व नर्स दिवस पर कविता)-…

सफ़ेद कपड़ों में लिपटी हुई देवी एक दिन पूछा था किसी ने..उन सफ़ेद कपड़ों में लिपटी हुई देवी से,"सबकी सेवा करती हुई तुम कभी थकती नही,ना ही आता है…