गौ सिरतोन ईमान

गौ सिरतोन ईमान

जबले मारे गोरी नैइना के बान।
जीना मोर होगे कठिन हो गय परेशान ।
(गौ सिरतोन ईमान) x 2
ले गय मोर जान गौ सिरतोन ईमान.

मय नइ आये पाछु ,सुनले बेईमान ।
मया करे बर तय हो गय अघुआन ।

(गौ सिरतोन ईमान) x 2
ले गय मोर जान गौ सिरतोन ईमान.

ए…. रातभर तोरे, फोटूएडिट करव .
बस तोरे संग , मय चैटिंग करव ।
खुश रहस तय अऊ का चाहिये मोला
तोरे बर ही तो, बाल सेटिंग करव ।
तय मोर शान गोरी तय ही मोर गुमान।
संग तोरे रिहो सदा देवतहो जुबान।
कोरस…… ऐ आ

हाँ.

हाथ भर भर ले,मेंहदी रचा लेवव।
बस तोरे नांवके, गोदना गोदा लेवव।
खुश रहस तय अउ का चाहिये मोला
तोरे बर ही तो, काजर लगा लेवव।
तय मोर पिरित साथी तय ही मोर परान।
बरत रह

कोरस…… ऐ आ

तोर मोर जोही संगी ,जइसे धनुष बान।

(गौ सिरतोन ईमान) x 2
ले गय मोर जान गौ सिरतोन ईमान.

मनीभाई नवरत्न
मनीभाई नवरत्न

📝 कवि परिचय

यह काव्य रचना छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के बसना ब्लाक क्षेत्र के मनीभाई नवरत्न द्वारा रचित है। अभी आप कई ब्लॉग पर लेखन कर रहे हैं। आप कविता बहार के संस्थापक और संचालक भी है । अभी आप कविता बहार पब्लिकेशन में संपादन और पृष्ठीय साजसज्जा का दायित्व भी निभा रहे हैं । हाइकु मञ्जूषा, हाइकु की सुगंध ,छत्तीसगढ़ सम्पूर्ण दर्शन , चारू चिन्मय चोका आदि पुस्तकों में रचना प्रकाशित हो चुकी हैं।

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