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अन्य काव्य शैली

चौपई या जयकरी छंद कैसे लिखें

चौपई या जयकरी छंद विधान – इसके प्रयेक चरण में 15 मात्रा होती हैं, अंत में 21 या गाल अनिवार्य होता है, कुल चार चरण होते हैं, क्रमागत दो-दो चरण तुकांत…

चौपाई छंद [सम मात्रिक] कैसे लिखें

चौपाई छंद विधान – इसके प्रत्येक चरण में 16 मात्रा होती हैं , अंत में 21 या गाल वर्जित होता है , कुल चार चरण होते हैं , क्रमागत दो-दो चरण तुकांत होते…

श्रृंगार छंद [सम मात्रिक]कैसे लिखें

श्रृंगार छंद (उपजाति सहित) विधान – इसके प्रत्येक चरण में 16 मात्रा होती हैं, आदि में क्रमागत त्रिकल-द्विकल (3+2) और अंत में क्रमागत द्विकल-त्रिकल…

पदपादाकुलक/राधेश्यामी/मत्तसवैया छंद [सम मात्रिक]

पदपादाकुलक/राधेश्यामी/मत्तसवैया छंद विधान – पदपादाकुलक छंद के एक चरण में 16 मात्रा होती हैं , आदि में द्विकल (2 या 11) अनिवार्य होता है किन्तु…

चौपाई आधारित छंद कौन कौन से है

चौपाई आधारित छंद :16 मात्रा के चौपाई छंद में कुछ मात्राएँ घटा-बढ़ाकर अनेक छंद बनते है l ऐसे चौपाई आधारित छंदों का चौपाई छंद से आतंरिक सम्बन्ध यहाँ पर…

कुण्डलिनी छंद [विषम मात्रिक ]कैसे लिखें

कुण्डलिनी छंद विधान - दोहा और अर्ध रोला को मिलाने से कुण्डलिनी छंद बनता है जबकि दोहा के चतुर्थ चरण से अर्ध रोला का प्रारंभ होता हो (पुनरावृत्ति)…

कुण्डलिया छंद [विषम मात्रिक] कैसे लिखें

कुण्डलिया छंद विधान – दोहा और रोला को मिलाने से कुण्डलिया छंद बनता है जबकि दोहा के चतुर्थ चरण से रोला का प्रारंभ होता हो (पुनरावृत्ति) तथा प्रारंभिक…