विविध छंदबद्ध काव्य

छंद में प्रयुक्त अक्षरों की संख्या एवं क्रम, मात्रा-गणना होती है. इसके अलावा, यति-गति से सम्बद्ध विशिष्ट नियमों से नियोजित पद्य रचना ‘’छन्द’’ कहलाती है। छंद शब्द के मूल में गति का भाव है।

The number and order of the letters used in the verse is a quantity-calculation. In addition, the verse formulation employed by specific rules related to the Yeti-motion is called “Chhand”. At the root of the word stanza is the sense of motion.

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संविधान पर दोहे

——संविधान—— सपने संत शहीद के,थे भारत के नाम।है उन स्वप्नों का सखे, संविधान परिणाम।। पुरखों ने निज अस्थियों,का कर डाला दाह।जिससे पीढ़ी को मिले, जगमग ज्योतित राह।। संविधान तो पुष्प है, बाग त्याग बलिदान।अगणित अँसुवन धार ने,सींची ये मुस्कान।। भीमराव अंबेडकर,थे नव भारत दूत।संविधान शिल्पी कुशल, सच्चे धरा सपूत।। लोकतंत्र संदर्भ में, संविधान का अर्थ।ऐसी …

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संविधान दिवस को समर्पित दोहे

संविधान दिवस को समर्पित दोहे संविधान में लिख गए, तभी मिले अधिकार।बाबा साहब आप को, नमन करें शत बार।। संविधान ने ही दिया, मान और सम्मान।वरना तो हम थे सभी,खुशियों से अनजान।। संविधान से ही मिला, जीवन का अधिकार।वरना तो खाते रहे, वर्णाश्रम की मार।। छुआछूत भी कम हुआ, शुद्र हुए आजाद।जात-पात को खत्म कर,किए …

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संविधान शुभचिंतक सबका

संविधान शुभचिंतक सबका (आल्हा छंद) विश्लेषकजन का विश्लेषण, सुधीजनों का है उपहार।संविधान शुभचिंतक सबका, बांटे जो जग में अधिकार।। जन मानस सब विधि के सम्मुख, कहते होते एक समान।अपने मत का पथ चुन लें हम, शिक्षा का भी मुक्त विधान।।समता से अवसर हो हासिल, सबके सपने हों साकार।संविधान शुभचिंतक सबका, बांटे जो जग में अधिकार।। …

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चांदनी पर कविता

शुभ्र शरद पूर्णिमा – बाबूलाल शर्मा

शुभ्र शरद पूर्णिमा – बाबूलाल शर्मा शुभ्र शरद शुभ पूर्णिमा, लिए शीत संकेत।कर सोलह शृंगार दे, चंद्र प्रभा घर खेत।। दक्षिण पथ रवि रथ चले, शरद पूर्णिमा देख।कृषक फसल के बीज ले, हल से लिखे सुलेख। श्वाँस कास उपचार हित, खीर चाँदनी युक्त।उत्तम औषधि वैद्य दे, करे रोग से मुक्त।। सुधा बरसता चन्द्र से, कहते …

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Mahatma gandhi

दोहा मुक्तक-बापू पर कविता

दोहा मुक्तक-बापू पर कविता सदी वही उन्नीसवीं, उनहत्तर वीं साल।जन्मे मोहन दास जी, कर्म चंद के लाल।बढ़े पले गुजरात में, पढ़ लिख हुए जवान।अरु पत्नी कस्तूरबा, जीवन संगी ढाल। भारत ने जब ली पहन, गुलामियत जंजीर।थी अंग्रेज़ी क्रूरता, मरे वतन के वीर।हाल हुए बेहाल जब, कुचले जन आक्रोश।देख दशा व्याकुल हुए, गाँधी जी मति धीर। …

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अब तो मन का रावण मारें(१६ मात्रिक गीत)

अब तो मन का रावण मारें (१६ मात्रिक गीत) बहुत जलाए पुतले मिलकर,अब तो मन का रावण मारे। जन्म लिये तब लगे राम से,खेले कृष्ण कन्हैया लगते।जल्दी ही वे लाड़ गये सब,विद्यालय में पढ़ने भगते।मिल के पढ़ते पाठ विहँसते,खेले भी हम साँझ सकारे।मन का मैं अब लगा सताने,अब तो मन का रावण मारें। होते युवा …

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विजय पर्व दशहरा

विजय पर्व दशहरा राम समन्दर सेतु हित, कपि गण नल हनुमंत।सतत किए श्रम साधना, कृपा दृष्टि सियकंत।। किए सिन्धु तट स्थापना, पूजे सहित विधान।रामेश्वर शुभ रूप शिव, जगत रहा पहचान।। सैन्य चढ़ी गढ़ लंक पर, दल ले भालु कपीश।मरे दनुज बहु वीर भट, सजग राम जगदीश।। कुम्भकर्ण घननाद से, मरे दनुज दल वीर।राक्षसकुल का वह …

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चैत्र शुक्ल श्री राम नवमी Chaitra Shukla Shri Ram Navami

राम-नाम विधा :- चौपाई

राम-नाम विधा :- चौपाई राम-नाम लगे सबको प्यारा |सबने ही तन-मन में धारा ||राम सभी के पूज्य कहावे |सच्चे मन से सब जन ध्यावे || सबको सद् का मार्ग दिखाते |बीच भँवर से पार लगाते ||प्रभु नाम की जपे जो माला |रहते उन पर सदा कृपाला || छण में दुष्ट ताड़का मारी |छूँ कर शिला …

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आश्विन शुक्ल दशमी दशहरा Ashwin Shukla Dashami Dussehra

मनहरण घनाक्षरी -दशहरा

मनहरण घनाक्षरी -दशहरा नवरात्रि अतिकान्त,दैत्यगण भयाक्रांत,तिथि विजयदशमी,सब को गिनाइए। राम जैसे मर्यादित,रहो सखे शांतचित,धीर वीर देश हित,गुण अपनाइए। यथा राम शक्ति धार,दोष द्वेष गर्व मार,तिया के सम्मान हेतु,पर्व को मनाइए। आसुरी प्रतीक मान,सनातनी रीति ज्ञान,दानवी बुराई रूप,रावण जलाइए। बाबू लाल शर्मा, बौहरा, विज्ञसिकन्दरा, दौसा, राजस्थान

साक्षरता का अर्थ

राष्ट्र भाषा पर छंद– बाबूराम सिंह

राष्ट्र भाषा पर छंद सुखद हिन्द महान बनाइए।मधुर बोल सदैव अपनाइए।प्रगति कारक भारत हो तभी।सरस काम करें अपना सभी। अजब ज्ञान भरें शुभदा लिए।सहज भावभरोस भव्य किए।गुण सभी इसमें जग आगरी।लखअमोलक है लिपि नागरी। महक मानवतामय है सिखो।मन लगाकर जागउठी लिखो।सँवर जाय तभी जग जानिये।बढ़ उठे शुचि भारत मानिये। जगत हिंद सु-बोल जगाइए।सरलता शुभ है …

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