कारगिल के वीर जवान

 कारगिल के वीर जवान

शहीदों पर कविता
शहीदों पर कविता

देश के लिए हो गए कुर्बान,
शेर जैसा लड़े हमारे जवान।
कोई खोया पिता – भाई और पुत्र,
किसी का उतर गया मंगल-सूत्र।
कर युद्ध शत्रुओं से दे दी अपनी जान,
ऐसे थे, कारगिल के वीर जवान।

कोई था शहर से कोई गाँव वाला,
था भारतीय सरहद पर लड़ने वाला।
कर रक्षा हमारा खाते दुश्मनों के गोली,
खुशी से मनाते हम दिवाली – होली।
वतन के वीर न कोई हिन्दू – मुसलमान,
ऐसे थे, कारगिल के वीर जवान।

कोई था पंजाबी कोई राजस्थानी,
जुबाँ पर सबके गीत था हिन्दुस्तानी।
माँ की लोरी – नानी की कहानी,
वीरों को याद था मुँह-जुबानी।
शोले थी आँखों में दिल में हिन्दुस्तान,
ऐसे थे, कारगिल के वीर जवान।

याद नहीं उन्हें गर्मी ठंड और बरसात,
त्याग कर सुख लड़े दुश्मनों के साथ।
मालूम नहीं था क्या दिन और रात,
लड़कर दुश्मनों को किए परास्त।
जीता भारत हारा पाकिस्तान,
ऐसे थे, कारगिल के वीर जवान।

कर फतह रण को लहराया तिरंगा,
कोई नहीं लेता भारतीयों से पंगा।
शहीद की अभिलाषा मिले हिन्द का धूल,
राहें वीरों के और कब्र में भर देना फूल।
वीरों को मिला परमवीर – चक्र सम्मान,
ऐसे थे, कारगिल के वीर जवान।

 अकिल खान रायगढ़ जिला- रायगढ़ (छ.ग.) पिन – 496440.

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