कवि पर कविताBy कविता बहार / हिंदी कविता कवि पर कविता साहित्य के चूल्हे परशब्दों का तवा चढ़ावैचारिकता की लकड़ी मेंभावनाओं की आग जलाकरकलम की चिमटी सेमैं कविताओं की रोटियां सेंकता हूँहाँ! मैं कवि हूँ।©तिलसमानी_KYS 📢 इस पोस्ट को अपने दोस्तों के साथ शेयर करें: 📲 WhatsApp ✈ Telegram 📘 Facebook Related Posts ज़िंदगी की राह/ निमाई प्रधान’क्षितिज अरुणोदय नया संसार बसायेंगे अब तरूणों को आना होगा हम परिन्दे नयी सुबह पर कविताLeave a CommentYour email address will not be published. Required fields are marked *Type here.. Name* Email* Website Save my name, email, and website in this browser for the next time I comment.