सरस्वती माँ पर कविता-बाबू लाल शर्मा बौहरा

सरस्वती माँ पर कविता

माघ शुक्ल बसंत पंचमी Magha Shukla Basant Panchami
माघ शुक्ल बसंत पंचमी Magha Shukla Basant Panchami

शारदे आप ही आओ।
कंठ मेरे तुम्ही गाओ।
शान बेटी सयानी के।
बात किस्से गुमानी के।

धाय पन्ना बनी माता।
मान मेवाड है पाता।
पद्मिनी की कहानी है।
साहसी जो रुहानी है।

बात झाँसी महारानी।
शीश हाड़ी दिए मानी।
वीर ले जा निशानी है।
बात सारी सिखानी है।

बेटियों को बचानी है।
शान शिक्षा दिलानी है।
कर्म कर्त्तव्य भी जानें।
वक्त की माँग को मानें।

शान मानें तिरंगा की।
बेटियाँ, आन गंगा की।
गीत गाओ सुनाओ तो।
चंग साथी बजाओ तो।

देश के गीत गाने हैं।
भारती के तराने हैं।
भाव सद्भाव वे सच्चे।
पालने प्रेम से बच्चे।

सैनिकों के हितैषी हों।
बेटियाँ मान पोषी हो।
नागरी मान हिंदी का।
भारती भाल बिंदी का।

हिंद के गीत गाऐं जो।
शत्रु के शीश लाऐं जो।
वीर जन्में शिवा जैसे।
पूत पालें सुता ऐसे।

छंद गाएँ जवानों के।
अन्नदाता किसानों के।
बेटियों वीरता गाओ।
राष्ट्र में धीरता लाओ।

देश की शान बेटी हो।
राष्ट्र का मान बेटी हो।
सृष्टि का सार बेटी हो।
ईश आभार बेटी हो।

  • बाबू लाल शर्मा, बौहरा
    सिकंदरा ३०३३२६
    दौसा राजस्थान,9782924479

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top