कद छोटा मगर
© राजेंद्र प्रसाद ‘राजन’
कद छोटा मगर कृतित्व से महान् थे लोहिया।
समता के पोषक, प्रणेता थे प्राण लोहिया ।
आस्तिक थे किंतु रूढिभंजक थे लोहिया ।
सचमुच दलित की, दीन की भाषा थे लोहिया ॥
अभिमान से अनभिज्ञ मस्तमौला थे लोहिया।
राष्ट्रीयता के भाव में सराबोर थे लोहिया ।
सीने में क्रांतिज्वाल और बाँहों में बल प्रबल ।
आजाद सोच मन लिये, तूफान थे लोहिया ।
अहिंसा के पथिक थे, ये मगर थे क्रांति दूत भी।
सिंह- सी गर्जन लिये मृगराज थे लोहिया ।
हिंदू थे जनम से, मगर मुसलिम, ईसाई भी।
इंसानियत से पूर्ण, मनुजवर थे लोहिया ।।
साहस, सुबुद्धि, त्याग से, प्रतिभा से पूर्ण थे।
सूरज-सा तेज, चंद्र-से शीतल थे लोहिया।
हीरे से मूल्यवान, दृढ थे वज्र से कठोर ।
बालक-सी सरलता लिये कोमल थे लोहिया ||
लैला ए हिंदुस्तान के, मजनू थे लोहिया।
शोषित, दलित व वंचितों के थे मान लोहिया ।
पीडित, दुःखी व दीन के, सचमुच थे मसीहा
‘राजन’ वो राजनीति की थे शान लोहिया ||
