KAVITA BAHAR
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“दीपक” के पाँच हाइकु

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पाँच हाइकु
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धान की बाली
महकती कुटिया
खुश कृषक ।

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फूली सरसों 
पियराने लगे हैं 
मन के खेत ।
    
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पूष की रात
हल्कू जाएगा खेत
मन उदास ।

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भोर का रुप
मुस्कान बाँट रही
कोमल धूप ।

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ठिठुरी धरा
आकाश में कोहरा
छाया गहरा ।

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□ प्रदीप कुमार दाश “दीपक”
मो 7828104111