14 फरवरी – वैलेंटाइन डे : प्रेम, दिखावे से परे
(अतुकान्त कविता)
प्रेम
गुलाब की कीमत नहीं पूछता,
वह तो
काँटों के बीच भी
हाथ थामे रहने का नाम है।
प्रेम
स्टेटस पर नहीं चमकता,
वह चुपचाप
थकी हुई आँखों में
अपना घर बना लेता है।
प्रेम
एक दिन का उत्सव नहीं,
वह हर उस दिन मौजूद है
जब बिना कहे
किसी की पीड़ा समझ ली जाए।
मोमबत्तियाँ बुझ जाएँ,
उपहार खो जाएँ,
पर जो साथ
अँधेरे में भी खड़ा रहे—
वही प्रेम है।
इस 14 फरवरी,
इज़हार नहीं,
ईमानदारी चाहिए;
दिखावा नहीं,
साथ चाहिए।
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