प्रेमहीन काम, आनंदहीन जीवन
प्रेम और रिश्ते, हिंदी कविताप्रेमहीन काम, आनंदहीन जीवन अगर कामप्रेम योग्य नहीं है,तो जीवनजीने योग्यकैसे होगा? कामदिन की एक फ़ाइल नहीं,वहतुम्हारी पहचान की धुरी है—दिन उसी के इर्द-गिर्द घूमते हैं,सोच उसी से आकार लेती है,रिश्तेउसी की छाया में साँस लेते हैं। काम को छोटा समझनाअपने अस्तित्व केकेंद्र को नकारना है। जहाँ तुम खड़े होऔर जो तुम करते हो—उनके बीचफाँक
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