भादों के अंजोरी म आगे तीजा तिथि – मनीभाई नवरत्न

भादों के अंजोरी म आगे तीजा तिथि

सूत बिहनिया उठके , मय करव अस्नान ।
पार्वती ओ मैंइया तोरे हावे मोला धियान ।
जइसन पाये तय अपन भोला भगवान।
वइसन पावव हरजनम, मय अपन गोसान।

लाली चौकी फबेहे, सुग्घर भुइयां भित्ति।
भादों के अंजोरी म, आगे तीजा तिथि।
आसन बिराजे हे, भोलेबाबा पारबती।
भादों के अंजोरी म, आगे तीजा तिथि।

सोला सिंगार करव, बरत राखव निरजला।
सवनाही गीत गावव, झूलव मय हर झूला।
हरियर साड़ी पहिरव, हरियर बिंदिया।
हरियर चूरी चमके, पाव म पइरी बिछुआ।

पूजा पाठ करव, मोर सुहाग तोर सती।
भादों के अंजोरी म, आगे तीजा तिथि।

गंगा जल मिलावव, कन्हार माटी म।
शिवलिंग बैठारव,  अंगना मुहाटी म।
रिद्धि सिद्धि गणेश हे, सखी संग पार्बती।
विधि विधान ले, मय ह करव आरती।

तांबा कलश नरियर, थारी म दीया बाती।
भादों के अंजोरी म, आगे तीजा तिथि।

~ मनीभाई नवरत्न , बसना, महासमुंद, छत्तीसगढ़

मनीभाई नवरत्न
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📝 कवि परिचय

यह काव्य रचना छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के बसना ब्लाक क्षेत्र के मनीभाई नवरत्न द्वारा रचित है। अभी आप कई ब्लॉग पर लेखन कर रहे हैं। आप कविता बहार के संस्थापक और संचालक भी है । अभी आप कविता बहार पब्लिकेशन में संपादन और पृष्ठीय साजसज्जा का दायित्व भी निभा रहे हैं । हाइकु मञ्जूषा, हाइकु की सुगंध ,छत्तीसगढ़ सम्पूर्ण दर्शन , चारू चिन्मय चोका आदि पुस्तकों में रचना प्रकाशित हो चुकी हैं।

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