अमित अनुभूति के दोहे

अमित अनुभूति के दोहे

लिखने वाला लिख गया, उल्टे सीधे छंद।
बिना पढ़े कहते सभी, रचना बहुत पसंद।~1

कविता लेखन थोक में, मनमर्जी के संग।
शब्द शिल्प आहत हुए, भाव बड़ा बेढंग।~2

सृजनहार समृद्ध कहाँ, सुलझे नहीं विचार।
कविताई  के नाम पर, करता  है  व्यापार।~3

तुकबंदी करता फिरे, जीवन भर षटमार।
यत्र-तत्र छपने लगा, बनके रचनाकार।~4

नालायक नायक बना, मिला श्रेष्ठ सम्मान।
सज्जनता रोये ‘अमित’, देख दंभ अभिमान।~5

कड़वी कविता में ‘अमित’, सृजन समझ अनमोल।
शब्द जाल  संवेदना, अक्षर अक्षर  तोल।~6

व्यर्थ वाक्य हैं बोलते, विनत कहाँ व्यवहार।
वर वैभव की वासना, बातें लच्छेदार।~7

मोल कहाँ अब सत्य का, चाटुकारिता सार।
पद पैसे की चाह में, विज्ञापन ही सार।~8

पैसा देकर वो छपे, लिखते जो कमजोर।
थोथा बाजे है चना, करते केवल शोर।~9


कन्हैया साहू “अमित”

शिक्षक~भाटापारा (छ.ग)

संपर्क~9200252055
कविता बहार से जुड़ने के लिये धन्यवाद

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