कोठी तो बढ़हर के छलकत ले भरगे

कोठी तो बढ़हर के छलकत ले भरगे कोठी तो बढ़हर के* छलकत ले भरगे।बइमानी के पेंड़ धरे पुरखा हा तरगे॥अंतस हा रोथे संशो मा रात दिन।गरीब के आँसू हा टप-टप ले* ढरगे॥सुख के सपुना अउ आस ओखर मन के।बिपत के आगी मा सब्बो* हा  जरगे॥सुरता के रुखवा हा चढ़े अगास मा।वाह रे वा किस्मत! पाना … Read more

कहें सच अभी वो जमाना नहीं है

कहें सच अभी वो जमाना नहीं है कहें सच अभी वो जमाना नहीं है।यहाँ सच किसी को पचाना नहीं है॥मिले जो अगर यूँ किसी को अँगाकर। खिला दो उसे तो पकाना नहीं है॥लगे लूटने सब निठल्ले यहाँ पर।उन्हें तो कमाना धमाना नहीं है॥मुसीबत अगर आ गई तो फँसोगे। यहाँ बच सको वो बहाना नहीं है॥पसीना बहाया यहाँ … Read more

बाते सोलह आने सच है

बाते सोलह आने सच है पानी के लिए कुँएँ बावली नल में होता है खूब जमावमहाराष्ट्र में लगा था धारा 144 देख कर भीड़ में टकराव पानी के स्रोतों के पास समूह नहीं हो सकते थे खड़ेजल संकट से जूझ रहे हैं धीरे धीरे राज्य छोटे बड़े आगे चल कर के पानी के लिए छिड़ … Read more

कविता मेरी ऐसी हो

कविता मेरी ऐसी हो कविता मेरी  ऐसी होजिसमें हो कोई संदेश ।संतों की वाणी हो जिसमेंगीता का उपदेश ।गौतम हो गुरू नानक होहो उनकी गुरु वाणीगंगा जल की पवित्रता होमहानदी का पानी ।गंगा से सिंचित कविता कोमिले नया  परिवेश ।संतों की वाणी हो जिसमेंगीता का उपदेश ।लक्ष्मी बाई हो कविता मेंभगत सिंग  बलिदानी ।विस्मिल और … Read more

जीवन की है परिभाषा

जीवन की है परिभाषा अक्षर अक्षर भावों से  गुंजितकल्पना की मिठास है कविताकवि मन की मर्म अभिव्यंजनामृदु निर्झरित एहसास है कविता lसुख दुख से परिपूर्ण जीवन कीशब्द शक्ति की आशा है कवितारवि किरणों से भी सशक्त है येजीवन की है परिभाषा कविता lमन  हृदयभाव उद्गारों की  निधिकपोल कल्पित स्मित है कवितामरु को  भी  मधुमय  कर … Read more