भगत सिंह तुम्हारा नाम अमर / मनीभाई नवरत्न

भगत सिंह तुम्हारा नाम अमर

(Intro)
देश की माटी का सपूत था वो,
अंग्रेज़ों के लिए काल था।
कभी डरते ना, कभी ना झुकते थे,
आजादी का मिसाल था ।

(Chorus)
भगत सिंह, भगत सिंह, तुम्हारा नाम अमर
तुम्हारे शौर्य वीरता को, गाता है घर घर।

भगत सिंह, भगत सिंह, तुम्हारा नाम अमर ,
तुम्हारे शौर्य वीरता को, गाता है घर घर।

(Verse1)
फांसी का फंदा हंसते हुए पहना,
देश के लिए जीवन किया न्योछावर ।
कुर्बानी दे दी अपने प्राण की ,
देशप्रेम कीi भावना , लाने लगा असर।

(Chorus)
भगत सिंह, भगत सिंह, तुम्हारा नाम अमर ,
तुम्हारे शौर्य वीरता को, गाता है घर घर।

भगत सिंह, भगत सिंह, तुम्हारा नाम अमर ,
तुम्हारे शौर्य वीरता को, गाता है घर घर।

(Verse 2)
हौंसले तुम्हारे सीखाता है हमको,
डर के आगे नहीं झुकना है कभी।
रास्ते तुम्हारे चलकर हमको,
मंजिल से पहले नहीं रुकना है कभी।

(Chorus)
भगत सिंह, भगत सिंह, तुम्हारा नाम अमर ,
तुम्हारे शौर्य वीरता को, गाता है घर घर।

भगत सिंह, भगत सिंह, तुम्हारा नाम अमर ,
तुम्हारे शौर्य वीरता को, गाता है घर घर।

(Outro)
देश की माटी का सपूत था वो,
अंग्रेज़ों के लिए काल था।
कभी डरते ना, कभी न झुकते थे,
आजादी का मिसाल था ।

मनीभाई नवरत्न

मनीभाई नवरत्न
मनीभाई नवरत्न

📝 कवि परिचय

यह काव्य रचना छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के बसना ब्लाक क्षेत्र के मनीभाई नवरत्न द्वारा रचित है। अभी आप कई ब्लॉग पर लेखन कर रहे हैं। आप कविता बहार के संस्थापक और संचालक भी है । अभी आप कविता बहार पब्लिकेशन में संपादन और पृष्ठीय साजसज्जा का दायित्व भी निभा रहे हैं । हाइकु मञ्जूषा, हाइकु की सुगंध ,छत्तीसगढ़ सम्पूर्ण दर्शन , चारू चिन्मय चोका आदि पुस्तकों में रचना प्रकाशित हो चुकी हैं।

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