चैत्र मास संवत्सर / परमानंददासBy कविता बहार / हिंदी कविता कविता संग्रह चैत्र मास संवत्सर परिवा बरस प्रवेस भयो है आज।कुंज महल बैठे पिय प्यारी लालन पहरे नौतन साज॥१॥आपुही कुसुम हार गुहि लीने क्रीडा करत लाल मन भावत।बीरी देत दास परमानंद हरखि निरखि जस गावत॥२॥📢 इस पोस्ट को अपने दोस्तों के साथ शेयर करें: 📲 WhatsApp ✈ Telegram 📘 Facebook Related Posts ज़िंदगी की राह/ निमाई प्रधान’क्षितिज अरुणोदय नया संसार बसायेंगे अब तरूणों को आना होगा हम परिन्दे नयी सुबह पर कविताLeave a CommentYour email address will not be published. Required fields are marked *Type here.. Name* Email* Website Save my name, email, and website in this browser for the next time I comment.