डिजेन्द्र कुर्रे कोहिनूर के मुक्तक कविता

डिजेन्द्र कुर्रे कोहिनूर के मुक्तक कविता

kavita

मुक्तक – बदरिया की घटाओ सी

बदरिया की घटाओ सी ,तेरी जुल्फें ये कारे है
तेरे माथे की बिंदिया से, झलकते चाँद तारे है
कभी देखा नहीं हमने, किसी चंदा को मुड़ मुड़ के
मगर पूनम तेरी आँखों में,हमने दिल ये हारे है

गैरों से तेरा मिलना, मुझे तिल तिल जलाता है
मगर फिर भी मेरा ये दिल, तेरा ये गीत गाता है
तड़पता हूँ तुझे पाने को सपनों में भी जानेमन
चले आना मेरी पूनम , तुझे ये दिल बुलाता है

मेरे दिल में तेरे ही प्यार, का पूनम बसेरा है।
उजाला तू ही मेरी है, तेरे बिन सब अंधेरा है।
समझना मत कभी मुझको,पराया दूर का कोई।
प्रिया इतना समझ लेना,ये कोहिनूर तेरा है।
★★★★★★★★★★★★★★★★★
डिजेन्द्र कुर्रे”कोहिनूर”

मुक्तक – वहीं तो राह है मेरी

तू मंजिल बन जहाँ बैठी,वहीं तो राह है मेरी ।
तेरा ही प्यार मैं पाऊँ, यहीं तो चाह है मेरी।
तेरे बिन मैं अधूरा हूँ, अधूरे है सभी सपने।
मेरे जीवन की नैय्या में, तु ही मल्लाह है मेरी ।

तुझे देखूँ तो लगता है,मोहब्बत की तू मूरत है।
तेरे बिन मैं कहाँ कुछ भी,तू ही मेरी जरूरत है।
सभी कहते है मुझको,यार तेरी दिलरुबा हमदम।
नगीनों से भी बढ़कर के,बहुत ही खूबसूरत है।

मुक्तक – चुलबुल परी


न कभी ओ झुकी,न किसी से डरी।
बोल उसके ज्यों बजने लगी बाँसुरी।
पापा कह-कह मुझे जो प्रफुल्लित करे,
मेरे बगिया की कोमल सी चुलबुल परी।

तेरी पैजनिया से,स्वर की बरसात हो।
मन को शीतल करे,तुम वही बात हो।
दिखता इंद्रधनुष , तेरी मुश्कान में।
तुम ही दिन हो मेरी,और तुम्ही रात हो।

मुक्तक – पूनम

कमर पतली बदन गोरा,घटा सी बाल है तेरी।
मधुर बोली है कोयल सी,गुलाबी गाल है तेरी।
तेरे नैना ये कजरारे,मुझे पागल बनाती है।
जवानी हुस्न के धन से,ये मालामाल है तेरी।

बुलाने को मुझे हमदम,कभी पायल बजाती हो।
चलाकर तीर नैनों से,मुझे हमदम रिझाती हो।
मगर बाहों में भरने को,ये मन बेताब होता है।
प्रिये पूनम नहीं क्यूँकर, मेरे तुम पास आती हो।

दीवाना बन गया हूँ मैं,तेरी चंचल अदाओं का।
तेरे तन को चले छूकर,उन्हीं महकी हवाओं का।
तेरे होठों को मैं चूमूँ , सदा बेताब रहता हूँ।
है चाहत मेरे इस मन को,तेरी भी आशनाओ का।

मेरी पूनम तेरे दिल में,समाके मर गया हूँ मैं।
तेरी ही नाम में अब तो,ये जीवन कर गया हूँ मैं।
बहुत बिगड़ा हुआ था मैं,मगर जब से मिली हैं तू।
तुझे पाने के चक्कर में,बहुत ही सुधर गया हूँ मैं।

तेरे हाथों को सहलाकर,ऐ पूनम थाम लूँगा मैं।
बुलाऊँगा इशारों से , नहीं अब नाम लूँगा मैं।
हमारे प्यार को कोई ,ना कोई जान पायेगा।
समझदारी से जानेमन,सभी अब काम लूँगा मैं।
★★★★★★★★★★★★★★★★★

डिजेन्द्र कुर्रे “कोहिनूर”

मुक्तक -प्यार

मेरे दिल में बसी यादें, सुबह से शाम तेरे है।
लबो पर सिर्फ ऐ पूनम,बस इक ही नाम तेरे है।
तुझे देखूँ तुझे चाहूँ, तुझे पूजू हर एक पल।
नहीं इससे बड़ा दुनिया में,कुछ भी काम मेरे है।

मेरे दिल में भी कुछ लिख दे,मैं एक किताब कोरा हूँ।
मधुर लोरी अगर है तू , तू मोहक मैं भी लोरा हूँ।
नहीं मैं कम किसी भी बात में ,तुझसे मेरी हमदम।
तू गर पूनम है रातों की,तो मैं भी इक चकोरा हूँ।

तेरी कंगन की खन-खन में,खनकता प्यार है मेरा।
तुझे गर जीत मिल जाए , समर्पित हार है मेरा।
शिवा तेरे बिना पूनम , नहीं कुछ सूझता मुझकों।
तेरे पल्लू के साये में , सुखद संसार है मेरा।

डिजेन्द्र कुर्रे “कोहिनूर”

मुक्तक – तुम्हारे बिन मैं रातों को

तुम्हारे बिन मैं रातों को,तड़प कर आहें भरता हूँ।
तेरी यादों की गलियों में,मैं रुक रुक कर गुजरता हूँ।
नहीं कुछ सूझता मुझकों,तेरे बिन आज दुनिया में।
मैं प्यासा हूँ मेरी पूनम,तुम्हीं से प्यार करता हूँ।

निगाहें जब उठाती हो,खिली इक बाग लगती हो।
जो रहती हो कभी गुस्सा में,भड़की आग लगती हो।
मगर हमदम इशारों में,मुझे जब जब बुलाती हो।
महकता सुर्ख कोमल सा,प्रेम गुलाब लगती हो।

किसी मंदिर की मूरत सी,तेरी सूरत ये पावन है।
तेरी बोली मधुर मुझको,सदा लगती सुहावन है।
तेरे कदमों में कोहिनूर,तन मन हार बैठा है।
तू मिल जाए अगर मुझको,वहीं घनघोर सावन है।

दीवाना हूँ उजालों का,नहीं अंधियार चाहूँ मैं।
दुखों से दूरियाँ नित हो,सदा सुखसार चाहूँ मैं।
ना मुझसे दूर होना तुम,तेरे बिन मर ही जाऊँगा।
मेरी पूनम जनम भर का,तेरा ही प्यार चाहूँ मैं।

बड़ा प्यारा है हर इक पल,मेरे जो पास रहती हो।
मैं उड़ जाता हूँ अम्बर में,मुझे हम दम जो कहती हो।
तेरे बिन मैं नहीं कुछ भी,तुम्ही हो दिल की धड़कन में।
लहू की धार बनके तुम,मेरे रग रग में बहती हो।

तुम्ही हमदम मेरा जीवन,मेरे ख्वाबों की रानी हो।
जो सुख दुख में सदा संग है,मेरे आँखों का पानी हो।
अधूरा हूँ तेरे बिन मैं, नहीं जी पाऊँगा जग में।
मेरे जीवन के पथ में प्रेम की ,तुम ही कहानी हो।

डिजेन्द्र कुर्रे”कोहिनूर”

कोहिनूर
कोहिनूर
📍 मुड़ीडीह (बसना )

📝 कवि परिचय

परिचय
नाम - डिजेन्द्र कुर्रे"कोहिनूर"
पिता - श्री गणेश राम कुर्रे
माता - श्रीमती फुलेश्वरी कुर्रे
शिक्षा - बीएससी बायो.,एम.एस.सी. जूलॉजी,एम.ए.हिंदी,समाजशास्त्र, संस्कृत,एम. ए. छत्तीसगढ़ी,डी एड,पीजीडीसीए
जन्मतिथि - 5 सितंबर 1984
पद - शिक्षक(समन्वयक संकुल केंद्र जमदरहा)
स्थाई पता - ग्राम पीपरभौना, पोस्ट धनगाँव,तहसील बिलाईगढ़,जिला सारंगढ़ बिलाईगढ़ (छ.ग.)
वर्तमान पता-मिडिल स्कूल पुरुषोत्तमपुर,तहसील बसना,
जिला महासमुंद (छ.ग.)

प्रकाशित कृतियाँ -
1.कोहिनूर की आभा(प्रथम काव्य संग्रह)
2.मेरी ताकत है कलम (द्वितीय काव्य संग्रह)
3.सतनाम चालीसा
4.सुमता के अंजोर (छत्तीसगढ़ी काव्य संग्रह)
5.ज्ञान सुधा (बाल पत्रिका)
6.कोहिनूर दीवाना (मुक्तक संग्रह )
संपादकीय संग्रह --
1.सोनहा बिहान (छत्तीसगढ़ी काव्य संग्रह)
2.संस्कार सरोवर (हिंदी काव्य संग्रह)
3.सोनहा बिहान भाग 2(छत्तीसगढ़ी काव्य संग्रह)
4.अजर अमर सतनाम (छत्तीसगढ़ी काव्य संग्रह)
5.होली के हंसगुल्ले (राष्ट्रीय साझा संकलन)
6.नीलांचल काव्यांजली (राष्ट्रीय साझा संकलन)
7.एक मुस्कान (राष्ट्रीय साझा संकलन)
8.महिमा वीर नारायण के (छत्तीसगढ़ी साझा संकलन)
9.कर्मयोगी संत गाडगे महाराज (राष्ट्रीय साझा संकलन)
10.मोर छत्तीसगढ़ महतारी (साझा संग्रह)
11.अवध में राम पधारें है (राष्ट्रीय साझा संग्रह )
12.संत गौरव बाबा गाडगे (राष्ट्रीय साझा संकलन )
13.विश्व रत्न बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर (अंतराष्ट्रीय साझा संकलन )
14.मया के खजाना (छत्तीसगढ़ी साझा संकलन )
15.गीत (राष्ट्रीय साझा संकलन )
16.आजादी के नायक (इंडिया बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड )
17.संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास (राष्ट्रीय साझा संग्रह )
साझा प्रमुख संग्रह -
01.छन्दबद्ध भारत का संविधान (गोल्डन बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज )
02.छत्तीसगढ़ सम्पूर्ण दर्शन (गोल्डन बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड)
03.छंदबद्ध वृहद हिंदी व्याकरण (गोल्डन बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड)
अन्य रचनाएँ - अर्धशताधिक साझा संकलन में रचनाएँ एवं देश की कई पत्र पत्रिकाओं में रचनाएँ सतत प्रकाशित।

विधा - मुक्त छंद,घनाक्षरी,मुक्तक, गीत, कहानी, हायकू, दोहा, कुंडलियाँ,पद्य आदि विधाओ पर 1000से अधिक रचनायें।

सम्मान ---
1.मुख्यमंत्री गौरव अलंकरण सम्मान 2019
2.छत्तीसगढ़ गौरव सम्मान 2019
3.डॉ.अम्बेडकर शिक्षा क्रांति 2019
4.राष्ट्रीय स्तर में गोल्ड,सिल्वर,एवं ब्रॉन्ज मेडल (कराटे खेल)
5.गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड(छत्तीसगढ़ संपूर्ण दर्शन) 2023
6.युवा साहित्य रत्न सम्मान 2024
7.सावित्री बाई फुले सम्मान 2024
8.गोल्डन बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड (छंदबद्ध भारत का संविधान) 2024
9.गोल्डन बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड (छंदबद्ध वृहद हिंदी व्याकरण) 2025

सैकड़ों साहित्यिक सम्मान।कला कौशल साहित्य संगम प्रदेश सचिव,इनके अलावा कई मंचों में पद पदाधिकारी दायित्वों का निर्वहन।
मोबाइल नंबर - 8120587822,9303921073
ईमेल - dijendrakurrey30@gmail.com

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