फैशन के दौर पर इच्छा की गारंटी ना करें -मनीभाई नवरत्न

👗 फैशन के दौर पर इच्छा की गारंटी ना करें 👠

फैशन बदलते हैं —
मौसम की तरह,
रंगों की तरह,
रुचियों की तरह।

आज जो नया है,
कल वही पुराना हो जाएगा।
आज जो आकर्षक लगता है,
कल वही अलमारी में पड़ेगा,
भूल गया, बेकार।

इच्छाएँ भी ऐसी ही होती हैं —
फैशन की तरह अस्थायी,
क्षणिक, चमकीली,
पर भीतर से रिक्त।

हर नया ट्रेंड
एक नई कमी का अहसास लाता है।
हर खरीद
थोड़े समय के लिए भरती है
मन की खाली जगह,
फिर वही खालीपन लौट आता है —
थोड़ा और बड़ा होकर।

फैशन के दौर में
इच्छा की गारंटी मत माँगो —
क्योंकि फैशन स्थायी नहीं,
और इच्छा कभी पूरी नहीं होती।

सच्चा सौंदर्य
कपड़ों में नहीं,
मन की सादगी में है।
सच्ची गरिमा
ब्रांड के लोगो में नहीं,
आँखों की सच्चाई में है।

फैशन चलेगा, बदलेगा,
पर अगर मन स्थिर हो गया —
तो वही फैशन है
जो कभी पुराना नहीं होगा।

इसलिए,
फैशन के दौर पर
इच्छा की गारंटी मत करें,
वरना चमक के नीचे
अपना चेहरा खो देंगे।

-मनीभाई नवरत्न

मनीभाई नवरत्न
मनीभाई नवरत्न

📝 कवि परिचय

यह काव्य रचना छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के बसना ब्लाक क्षेत्र के मनीभाई नवरत्न द्वारा रचित है। अभी आप कई ब्लॉग पर लेखन कर रहे हैं। आप कविता बहार के संस्थापक और संचालक भी है । अभी आप कविता बहार पब्लिकेशन में संपादन और पृष्ठीय साजसज्जा का दायित्व भी निभा रहे हैं । हाइकु मञ्जूषा, हाइकु की सुगंध ,छत्तीसगढ़ सम्पूर्ण दर्शन , चारू चिन्मय चोका आदि पुस्तकों में रचना प्रकाशित हो चुकी हैं।

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