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जार्ज फ्लॉयड पर कविता-
जार्ज फ्लॉयड तुम आदमी थे
तुम आदमी ही रहे
पर तुम्हें पता नहीं
कि शैतानी नज़रों में
आदमी होना कुबूल नहीं होता
आख़िर तुम मारे गए
काश तुम जान गए होते
कि तुम्हारा जिंदा रहने के लिए
तुम्हारा आदमी होना ज़रूरी नहीं था
जितना जरूरी था
तुम्हारी चमड़ी का गोरा रंग
जार्ज फ्लॉयड
काश की तुम्हें
गिरगिट की तरह
अपनी चमड़ी का रंग बदलना आता
तो तुम आज जिंदा होते
मार्टिन लूथर की हत्या से
तुमने क्यों नहीं सीखा..?
तुम्हारे हत्यारे
दिल से काले हैं तो क्या ?
दिखने में तो
बड़े ही खूबसूरत
और आकर्षक लगते हैं
तुमने अपना दिल तो उजला रखा
पर तुम्हारी काली चमड़ी का क्या ?
उन्हें सदियों से
काँटों की तरह चुभते रहे हैं
तुम्हारी चमड़ी का काला रंग
उन्हें तुम्हारा आदमी होना
कतई मंजूर नहीं
वे चाहते हैं
तुम बेजुबान जानवर की तरह
उनके अत्याचारों को सहते रहो
वे चाहते हैं
तुम्हारी नस्लें दास बनी रहे
बिना कुछ कहे उनकी सेवा करते रहे
उन्हें यह पसंद नहीं
कि तुम मानवीय अधिकारों के लिए
उनसे लड़ो और शोर मचाओ
एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन करो
उन्हें पसंद नहीं
कि तुम आगे बढ़ने के लिए
कोई सपना देखो
उन्हें पसंद नहीं
कि तुम कंधे से कंधा मिलाकर
उनके साथ-साथ बराबर चलो
उन्हें यह तो कतई पसंद नहीं
फूटे आँख पसंद नहीं
कि तुम उनके रहते हुए
सत्ता पर काबिज़ हो जाओ
और उन पर शासन करने लगो
— नरेन्द्र कुमार कुलमित्र
9755852479
