होलिका दहन पर हिंदी कविता / पंकज प्रियम

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होलिका दहन पर हिंदी कविता / पंकज प्रियम

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बुराई खत्म करने का प्रण करें
आओ फिर होलिका दहन करें।
औरत की इज्जत का प्रण करें,
आओ फिर होलिका दहन करें।

यहां तो हर रोज जलती है नारी
दहेज कभी दुष्कर्म की है मारी
रोज कोई रावण अपहरण करे
पहले इनका मिलकर दमन करे
आओ फिर…..

हर घर प्रह्लाद सा कुंठित जीवन
मां बाप के सपनों मरता बचपन
होटलो में मासूम धो रहा बरतन
पहले तो इन मुद्दों का शमन करें
आओ फिर …

सरहद पे रोज चलती है गोली
पहियों तले कुचलती है बोली
भूख कर्ज में रोती जनता भोली
पहले इतने बोझ को वहन करें
आओ फिर …

आओ फिर होलिका दहन करे
आओ फिर होलिका दहन करें।

पंकज प्रियम

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