लो चले आये तुम भी श्मशान

लो चले आये तुम भी श्मशान

कहाँ गया धन दौलत भाई,,
कहाँ गया तेरा अभिमान ,,,
बाँस की ठठरी चढ़कर भाई,,
लो चले आये तुम भी श्मशान ।

लुट गया धन दौलत भाई  ,,
मिट गया देख मेरा अभिमान,,
खाट छोड़ अब बाँस पे चढ़कर,,
लो चले आये हम भी श्मशान ।

कहाँ गया अरमान तुम्हारा,,
कहाँ गया तेरा सम्मान,,,,,,,
खत्म हुई जिन्दगी तुम्हारी,,
हा टुट गया गुमान ।।

नहीं रहा अरमान हमारा,,
खो गया मेरा सम्मान,,,
पाप की करनी भोग रहा हूँ,,
टुट गया गुमान रे भाई टुट गया गुमान।

कहता है सुन बाँके भाई,,
मत करना कभी अभिमान,,
एक हीं शाश्वत सत्य है भाई,,
शमशान हीं अपना मकान ।।
रे भाई शमशान हीं अपना मकान ।।

टुट गया गुमान रे भाई
पहुँच गया रे श्मशान   ।
कहे तुम्हारा बाँके भाई  ।
मत करना रे अभिमान ।

बाँके बिहारी बरबीगहीया

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top