मां पर कविता

माँ मै आ गया हू..
माँ अस्पताल के बिस्तर पर पड़ी है
ना सुन सकती है न बोल सकती है
देख कर भी कुछ कह नही सकती
काले अंधेर दुनिया मे गुम हो चुकी है
उम्मीद की किरण अब खो चुकी है
दुनिया को अलविदा कह चुकी है..
माँ मै आ गया हू…


जब वो बीमार थी
तब उसको इग्नोर करते रहे
अकेला छोड़ अपनी मस्ती मे डूबे रहे
बेटा बेटी पैसे का हिसाब करते रहे
कोन रखेगा उसका जुगाड़ करते रहे
कही इन्फैक्ट न हो जाऊ हाथ धोते रहे
माँ मै आ गया हू..
दरवाजे बंद अब घर मे नही है
दूर यात्रा पर निकल गयी है
सभी के शिकवे खत्म कर गयी
अब वो न लौट कर आयेगी
अपने दूध का हिसाब न मांगेगी
उसकी यादों मे अब जिंदगी खत्म हो जाएगी..
तुम बस चिल्लाते रहो
माँ मै आ गया हू.. ///

कमल कुमार सिंह
बिलासपुर

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