नज़र की नज़र से

नज़र की नज़र से

नज़र की नज़र से मुलाक़ात होगी
हज़ारों सवालों की बरसात होगी
बयाँ हर सबब हिज़्र का वो करेंगे
कि हर बेगुनाही की इस्बात होगी
सर-ए-राह हमसे जताना न उल्फ़त
गिरेंगे जो आँसू तो आफात होगी
नज़र फ़ेर ली तुमसे हमने कहीं जो
अदब पर ख़ताओं की शह-मात होगी
अगर दिल की राहें जुदा हो गईं तो
ख़लिश सी कहीं दिल में दिन रात होगी
इस्बात=साबित करना
आफात=मुसीबत
कुसुम शर्मा अंतरा
जम्मू कश्मीर
कविता बहार से जुड़ने के लिये धन्यवाद

इस रचना को शेयर करें

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top