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सद्व्यवहार – राकेश सक्सेना
घबराना नहीं है तुमको – कविता
करो जो बात फूलों की – कविता
बात मेरी मान लो मेरे प्यारे बच्चों तुम – कविता
हंगामा क्यों कर रहे हो तुम – कविता
आओ चलें कुछ दूर – कविता
दिल अब भी रोता है मेरा – कविता
तेरे चरणों में पुष्प बनकर मैं बिखर जाऊं तो अच्छा हो- कविता
उसने देखा जीवन बदल देने का सपना- कविता
काम करो भाई काम करो — अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”
कहाँ से छेड़ूँ फ़साना , कहाँ तमाम करूँ – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”
मुझे वो अपना गुजरा ज़माना याद आया – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”
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