कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

सरहद पर कविता-विनोद सिल्ला

हिंदी कविता

सरहद पर कविता सरहदों परव्याप्त हैभयावह चुप्पीकी जा रही हैचुपचाप निगहबानीकी जाती हैं बाड़बंधीनियन्त्रित करने कोइंसानों कोइंसानों की आवा-जाही कोकहा जाता हैकी जा रही है सुरक्षास्वतंत्रता कीसंप्रभुता कीसरहद नहीं होती प्रतीतस्वतन्त्रता की परिचायकसरहद तोकरती है नियंत्रितइंसानों कोउनकी स्वतंत्रता को

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holika-dahan

होलिका दहन पर कविता-प्रवीण त्रिपाठी

नारी जीवन और संवेदना

होलिका दहन पर कविता मधुमासी ऋतु परम सुहानी, बनी सकल ऋतुओं की रानी।ऊर्जित जड़-चेतन को करती, प्राण वायु तन-मन में भरती।कमल सरोवर सकल सुहाते, नव पल्लव तरुओं पर भाते।पीली सरसों ले अंगड़ाई, पीत बसन की शोभा छाई। वन-उपवन सब लगे चितेरे, बिंब करें मन मुदित घनेरे।आम्र मंजरी महुआ फूलें, निर्मल जल से पूरित कूलें।कोकिल छिप

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साथ-साथ पर कविता- रामनाथ साहू ननकी

हिंदी कविता

साथ-साथ पर कविता सम्मुख यूँ बैठो रहो ,जीवन जाये बीत ।मुक्त भाव से गा सकें ,सिर्फ प्यार के गीत ।।सिर्फ प्यार के गीत ,गढ़ें हम गीत वफा के ।मानस अंकित चित्र ,चले हम इसी अदा से ।।कह ननकी कवि तुच्छ ,सहेंगे हर इक सुख दुख ।सपने होंगे सत्य ,रहो जो मेरे सम्मुख ।। ~ रामनाथ

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शिवरात्रि पर कविता-कन्हैया लाल श्रीवास

हिंदी कविता

प्रस्तुत कविता शिवरात्रि पर आधारित है। वह त्रिदेवों में एक देव हैं। इन्हें देवों के देव महादेव, भोलेनाथ, शंकर, महेश, रुद्र, नीलकंठ, गंगाधार आदि नामों से भी जाना जाता है।

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कुण्डलिया शतकवीर- बाबूलाल शर्मा

समय और जीवन दर्शन

कुण्डलिया शतकवीर – बाबूलाल शर्मा १. *वेणी* मिलती संगम में सरित, कहें त्रिवेणी धाम!तीन भाग कर गूँथ लें, कुंतल वेणी बाम!कुंतल वेणी बाम, सजाए नारि सयानी!नागिन सी लहराय, देख मन चले जवानी!कहे लाल कविराय, नारि इठलाती चलती!कटि पर वेणी साज, धरा पर सरिता मिलती! २. *कुमकुम* माता पूजित भारती , अपना हिन्दुस्तान!समर क्षेत्र पूजित सभी,

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जीविनी युवा रचनाकार-आलोक कौशिक की

हिंदी कविता

जीविनी युवा रचनाकार आलोक कौशिक एक युवा रचनाकार एवं पत्रकार हैं। इनका जन्म 20 जून 1989 को एक ब्राह्मण परिवार में हुआ। इनके पिता का नाम पुण्यानंद ठाकुर एवं माता का नाम सुधा देवी है। मूलतः बिहार राज्य अन्तर्गत अररिया जिले के फतेहपुर गांव निवासी आलोक कौशिक ने स्नातकोत्तर (अंग्रेजी साहित्य) तक की पढाई बेगूसराय

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कवि पर दोहे

हिंदी कविता

कवि पर दोहे विधी की सृष्टि से बड़ा, कवि रचना संसार।षडरस से भी है अधिक,इसका रस भंडार।।1।। विधि रचना संसार का,इक दिन होता अंत।कवि की रचना का कभी ,कभी न होता अंत।।2।। रवि नही पहुँचे जहां,कवी पहुंच ही जाय।कवि की रचना सृष्टि में,सीमा कभी न आय।।3।। कवी शब्द की शक्ति से, रचता है संसार।सुंदर सुंदर

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सवेरा पर कविता

हिंदी कविता

सवेरा पर कविता हुआ सवेरा जानकर , गुंजन करे विहंग।चले नहाने सर्वजन,कलकल करती गंग।। नित्य सवेरे जो उठे , होता वह नीरोग।सुख से वह रहता सदा,करता है सुखभोग।। नित्य सवेरे जो जपे, मन से प्रभु का नाम।मिट जाते है कष्ट सब ,पाता वह आराम।। त्याग करें आलस्य का , जगें सवेरे नित्य।शुचि हो प्रभु का

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प्रेम दिवस पर कविता

हिंदी कविता

प्रेम दिवस पर कविता चक्षुओं में मदिरा सी मदहोशीमुख पर कुसुम सी कोमलतातरूणाई जैसे उफनती तरंगिणीउर में मिलन की व्याकुलता जवां जिस्म की भीनी खुशबूकमरे का एकांत वातावरणप्रेम-पुलक होने लगा अंगों मेंजब हुआ परस्पर प्रेमालिंगन डूब गया तन प्रेम-पयोधि मेंतीव्र हो उठा हृदय स्पंदनअंकित है स्मृति पटल परप्रेम दिवस पर प्रथम मिलन ……………….. :-आलोक कौशिक

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प्रेमगीत

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प्रेमगीत है मुझे स्मरण… जाने जाना जानेमन !वो पल वो क्षणहमारे नयनों का मिलनजब था मूक मेरा जीवनतब हुआ था तेरा आगमनकलियों में हुआ प्रस्फुटनभंवरों ने किया गुंजन है मुझे स्मरण… जाने जाना जानेमन !तेरा रूप तेरा यौवनजैसे खिला हुआ चमनचांद सा रौशन आननचांदनी में नहाया बदनझूम के बरसा सावनफूलों में हुआ परागण है मुझे

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मैं तो हूं केवल अक्षर पर कविता

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अक्षर पर कविता मैं तो हूं केवल अक्षरतुम चाहो शब्दकोश बना दो लगता वीराना मुझकोअब तो ये सारा शहरयाद तू आये मुझकोहर दिन आठों पहर जब चाहे छू ले साहिलवो लहर सरफ़रोश बना दो अगर दे साथ तू मेरागाऊं मैं गीत झूम केबुझेगी प्यास तेरी भीप्यासे लबों को चूम के आयते पढ़ूं मैं इश्क़ कीइस

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फागुन माह पर दोहा -मदन सिंह शेखावत

हिंदी कविता

फागुन माह पर दोहा -मदन सिंह शेखावत फागुन मास सुहावना, उड़ती रंग गुलाल।खेले अपनी मौज मे,कुछ भी नही मलाल।।1 फागुन आयो हे सखी, पिया बसे परदेश।कुछ भी अच्छा ना लगे,आये नही स्वदेश।।2 फागुन के हुडदंग मे, बाजे डोल मृदंग।नाचे सब मद मस्त हो,मिल गई बहु उमंग।।3 होली के त्यौहार मे , झूमे सब इटलाय।करते सभी

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