पावस के दोहे -कन्हैयालाल श्रीवास

पावस के दोहे -कन्हैयालाल श्रीवास

ऋतु पावस की आ गई, मेघ नीर ले साथ।
हरित चुनर भू ओढ़ ली, नदी ताल भर माथ।।


शीत हवा के साथ में, मेघ करें जब नाद।
हर्षित धरती हो गई , मिटा ताप अवसाद।।


हृदय मयूरा हो चला, पावस करें फुहार।
श्वेत बूँद जल रस मिलें, करें नृत्य गुलज़ार।।


मास सदा सावन बना,शिव की महिमा गान।
नीर पुष्प अर्पित करो, पावे नित वरदान।।


पावस है मन भावनी , प्रीति प्यार मनमीत।
धरा लुभाती है सखा , काग पीक खग गीत।।



कन्हैया लाल श्रीवास ‘आस’
भाटापारा छ.ग.

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