
● नंदा राही ‘देहलवी’
तेरे खूँ से शहीद ऊधम सिंह
तेरे खूँ से शहीद ऊधम सिंह,
हिंद का हर चिराग रोशन है।
तेरे कुरबानियाँ के सदके ही,
आज अपना दिमाग रोशन है।
तेरे हलके से एक झटके से,
बादशाहों के तख्त डोल गए ।
‘जलियाँवाले का मैंने बदला लिया’,
आसमाँ तक तेरे ये बोल गए ॥
तेरी मिट्टी तो उड़ गई लेकिन,
आँधियों के कदम उखाड़ गई।
तेरी आवाज दब गई बेशक,
जलजलों को मगर पछाड़ गई ।।
क्या मिटाएँगे आसमाँ उसको,
नक्श जो तू जमीं पे छोड़ गया ।
खून तेरा बिखर गया लेकिन,
जुल्म की सरहदों को तोड़ गया।
बदला लेने की आरजू तेरी,
तेरे सीने का खून चाट गई।
तेरी गरदन तो कट गई लेकिन,
जुल्म का बंद बंद काट गई ।।
