रोटी / विनोद सिल्लाBy कविता बहार / हिंदी कविता रोटी सांसरिक सत्य तोयह है किरोटी होती हैअनाज कीलेकिन भारत में रोटीनहीं होती अनाज कीयहाँ होती हैअगड़ों की रोटीपिछड़ों की रोटीअछूतों की रोटीफलां की रोटीफलां की रोटीऔर हांयहाँ परनहीं खाई जातीएक-दूसरे की रोटी।-विनोद सिल्ला 📢 इस पोस्ट को अपने दोस्तों के साथ शेयर करें: 📲 WhatsApp ✈ Telegram 📘 Facebook Related Posts ये शहर हादसों का शहर हो न जाए चुनाव का बोलबाला लोकतंत्र की हत्या नहीँ बताई अनुच्छेद 47 कवि होना नहीं है साधारण