शिव में ध्यान लगा -मनीभाई नवरत्न

शिव में ध्यान लगा

akelapan
शिव पर कविता

शिव में ध्यान लगा, रे मनुवा.
शिव में ध्यान लगा.
शिव में ध्यान लगा, रे मनुवा.
शिव में ध्यान लगा.

मौका मिला तुझे , शिव से मिलने को .
जाने ना दे ये पल, दिन है ढलने को ।
वरना होगा गुनाह, मिले ना फिर पनाह.
मन से अपने आलस भगा .
शिव में ध्यान लगा, रे मनुवा.
शिव में ध्यान लगा.

मंजिल है कठिन, और काँटों भरा .
शिवतेरा सहारा है, मिटे दुःख गहरा .
सब संभव है , तू जो मेरे पास है।
हटा दे मालिक बस, माया का पहरा ।
मेरे राम के प्यारे , बनो जी सहारे .
मेरे राम के प्यारे , बनो जी सहारे .
सिवा तेरे यहाँ , कोई ना सखा.
शिव में ध्यान लगा, रे मनुवा.
शिव में ध्यान लगा.

तुमसे भोला, ना कोई दूजा,
जग में है तेरा, नाम गूंजा.
देवों में महादेव,  सबसे बड़े
पाते हो विधाता , सबकी पूजा।
दुखहर्ता प्रभु, सुखदाता प्रभु,
दुखहर्ता प्रभु, सुखदाता प्रभु,
नींद से अपने को आज जगा,
शिव में ध्यान लगा, रे मनुवा.
शिव में ध्यान लगा.

-मनीभाई नवरत्न

मनीभाई नवरत्न
मनीभाई नवरत्न

📝 कवि परिचय

यह काव्य रचना छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के बसना ब्लाक क्षेत्र के मनीभाई नवरत्न द्वारा रचित है। अभी आप कई ब्लॉग पर लेखन कर रहे हैं। आप कविता बहार के संस्थापक और संचालक भी है । अभी आप कविता बहार पब्लिकेशन में संपादन और पृष्ठीय साजसज्जा का दायित्व भी निभा रहे हैं । हाइकु मञ्जूषा, हाइकु की सुगंध ,छत्तीसगढ़ सम्पूर्ण दर्शन , चारू चिन्मय चोका आदि पुस्तकों में रचना प्रकाशित हो चुकी हैं।

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