बाल कविता

बिल्ली पर बाल कविता

बिल्ली पर बाल कविता मेरी बिल्ली, काली-पीली।पानी से वह हो गई गीली ॥गीली होकर लगी कॉपने।आँछी-आँछी लगी छींकते ॥मैं फिर बोली कुछ तो सीखबिन रूमाल के कभी न छींक।